संपादकीय: पानी नहीं देने पर अड़े मान, पंजाब-हरियाणा में गहराया जल विवाद
अब पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद इतना तीखा हो उठा है कि पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है कि हरियाणा को एक बूंद पानी भी नहीं देंगे क्योंकि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है।
- Written By: दीपिका पाल
पंजाब-हरियाणा में गहराया जल विवाद (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: यह खेदजनक है कि जब गर्मी दस्तक देती है तो राज्यों के बीच नदी जल विवाद तीव्र होने लगता है।कावेरी जल विवाद कितने ही दशकों से जारी है जिससे कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच खटपट होती रहती है।अब पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद इतना तीखा हो उठा है कि पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है कि हरियाणा को एक बूंद पानी भी नहीं देंगे क्योंकि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है।प्रस्ताव में कहा गया कि हरियाणा ने 31 मार्च तक अपने हिस्से का पूरा पानी इस्तेमाल कर लिया है।
अब बीजेपी पंजाब के हक का पानी हरियाणा को देना चाहती है।पंजाब विधानसभा में विधायकों ने राज्य के हित को प्रमुखता देते हुए पार्टी लाइन से हटकर इस प्रस्ताव को समर्थन दिया।पिछले दिनों भाखडा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक हुई जिसमें बोर्ड के सदस्यों ने हरियाणा के लिए 8500 क्यूसेक्स पानी छोड़ने का निर्णय लिया।यह हरियाणा को हर माह मिलनेवाले 4000 क्यूसेक्स पानी से दोगुना था।इस बैठक में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के प्रतिनिधि एकमत थे।इन तीनों प्रदेशों में बीजेपी सत्ता में है।पंजाब ने इस निर्णय का विरोध किया जबकि हिमाचल प्रदेश तटस्थ रहा।पंजाब की दलील है कि हरियाणा पहले ही अपने वार्षिक हिस्से का 103 प्रतिशत पानी ले चुका है।इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने एक मंत्री के साथ नांगल पहुंचे और बांध के दरवाजे लॉक कर दिए।
अब केंद्र सरकार दोनों राज्यों से शांति व सहयोग की अपील कर रही है बीबीएमबी ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में शिकायत की कि पंजाब पुलिस ने नांगल बांध पर कब्जा कर रखा है।सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज-यमुना लिंक कैनाल विवाद पर सुनवाई करते हुए पंजाब व हरियाणा से कहा कि दोनों राज्य सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए केंद्र से सहयोग करें।यदि हल नहीं निकलता तो मामले की सुनवाई 13 अगस्त को की जाएगी पंजाब व हरियाणा दोनों कृषि प्रधान राज्य हैं।1966 में पंजाब का विभाजन कर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश नए राज्य बनाए गए।तभी से नदी पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया।
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सतलुज का पानी हरियाणा ले जाने के लिए सतलुज-यमुना लिंक नहर की खुदाई की गई जिसके विरोध में 1982 में पंजाब में धर्मयुद्ध मोर्चा शुरू किया गया।यह नहर दोनों राज्यों के बीच झगड़े की जड़ रही।पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने कार्यकाल में सतलुज यमुना लिंक समझौता रद्द कर दिया जिसकी बदौलत हरियाणा समृद्ध होता चला गया।बांध में पानी की कमी से पंजाब चिंतित है।वहां के 60 प्रतिशत खेतों को नहर से पानी मिलता है।अब यही रास्ता है कि दोनों राज्य आपस में अपने मतभेद सुलझाएं।केंद्र उनका मार्गदर्शन कर सकता है।
