संपादकीय: जमीन पर दावा आसान नहीं ! वक्फ बिल से आएगा व्यापक बदलाव
वक्फ बोर्ड के पास लाखों करोड़ की संपत्ति है लेकिन गरीब मुस्लिमों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वक्फ बिल को लेकर सरकार का दावा है कि यह बिल आजादी के बाद अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार दिलाने का प्रयास है।
- Written By: दीपिका पाल
वक्फ बिल से आएगा व्यापक बदलाव (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: आखिर टीडीपी, जदयू और लोजपा जैसे सिक्यूलर दलों की मदद से मोदी सरकार ने वक्फ बिल पारित करवा लिया. विपक्ष के सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गए. लोकसभा में 12 घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद पारित यह विधेयक सरकार की एक और उपलब्धि है जो इसके पहले नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, तीन तलाक को गैरकानूनी बनाने तथा उत्तराखंड में यूनिफार्म सिविल कोड पारित करवाने जैसे कदम उठा चुकी है. वक्फ बिल पर बहस के लिए सरकार की तैयारी काफी पुख्ता थी।
बिल पेश करते समय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड के पास लाखों करोड़ की संपत्ति है लेकिन गरीब मुस्लिमों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है. गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यह गलत धारणा है कि यह कानून मुस्लिमों के धार्मिक आचरण व दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करेगा. वक्फ बोर्ड में एक भी गैरमुस्लिम नहीं रहेगा. 1913 से 2013 तक 100 वर्षों में देश में 18 लाख एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड के अधीन थी. 2013 से 2025 तक इसमें 21 लाख एकड़ अतिरिक्त जमीन जोड़ दी गई. विश्व में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्ति भारत में है. भारतीय रेलवे और सेना के बाद जमीन के मामले में तीसरा नंबर वक्फ का आता है।
वक्फ बोर्ड के पास देश भर में 8,70,000 संपत्ति हैं जो 9,40,000 एकड़ जमीन पर फैली हुई हैं. इनकी अनुमानित कीमत 1.20 लाख करोड़ रुपए है. वक्फ का अर्थ है अल्लाह को स्थायी समर्पण! धार्मिक काम के लिए दी गई यह संपत्ति न वापस ली जा सकती है, न बेची जा सकती है. इसकी देखरेख मुतवल्ली करता है. वक्फ शब्द से इस्लामी दानशीलता व्यक्त होती है. कुरान की 20 से अधिक आयतें लोगों को दान के लिए प्रेरित करती हैं. विपक्ष का आरोप है कि यह बिल मुस्लिमों की संपत्ति हड़पने के लिए बनाया गया है. कल किसी अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की जमीन पर सरकार की नजर जाएगी. गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यह कानून पूर्वकालिक रूप से लागू नहीं किया जाएगा।
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विपक्ष द्वारा अल्पसंख्यंक समुदाय के लोगों में भय पैदा करना एक फैशन बन गया है. राम जन्मभूमि मंदिर, ट्रिपल तलाक और सीएए के समय भी मुस्लिम समुदाय में भय पैदा करने की कोशिश की गई थी. अभी वक्फ बोर्ड के सामने बड़ी चुनौती उसका अलोकतांत्रिक होना है. इनके अधिकांश सदस्य सरकार द्वारा मनोनीत होते हैं. गैरमुस्लिमों को वक्फ बनाने का अधिकार नहीं दिया गया है जबकि कोई भी संपत्ति धारक अपनी मर्जी से किसी को संपत्ति सौंपने का अधिकार रखता है. कोई कानून कैसे इस अधिकार को छीन सकता है? एक अन्य प्रावधान यह है कि मुस्लिम धर्म अपनाने के 5 वर्ष बाद ही कोई व्यक्ति वक्फ बना सकता है।
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सरकार का दावा है कि यह बिल आजादी के बाद अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार दिलाने का प्रयास है. अब वक्फ की ओर से किसी भी जमीन पर दावा करना आसान नहीं होगा. दान में मिली जमीन को ही वक्फ की प्रापर्टी माना जाएगा. वक्फ की पूरी संपत्ति पोर्टल पर दर्ज की जाएगी. इस्तेमाल के आधार पर किसी जमीन पर वक्फ का दावा नहीं माना जाएगा.
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
