नवभारत संपादकीय: सिंचाई की कमी ने छीनी किसानों की खुशहाली? जल संवर्धन से ही रुकेगी किसान आत्महत्या

Vidarbha Irrigation Crisis: विदर्भ में किसान आत्महत्याओं के पीछे सिंचाई की कमी को बड़ा कारण बताया गया है। क्षेत्र में लंबित सिंचाई परियोजनाओं और कृषि संकट पर फिर बहस तेज हुई है।
Navabharat Editorial: Has a Shortage of Irrigation Robbed Farmers of Their Prosperity? Farmer Suicides Can Only Be Halted Through Water Conservation.
विदर्भ किसान संकट, मंत्री नितिन गडकरी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Vidarbha Farmer Suicide Causes: जिस बात को विदर्भ के किसान कितने ही दशकों से महसूस कर रहे थे, उसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दोहराया है। उन्होंने स्वीकार किया कि विदर्भ में किसानों की बड़ी तादाद में आत्महत्या का प्रमुख कारण सिंचाई की कमी है। विदर्भवासी जानते हैं कि महाराष्ट्र की पिछली सरकारों का ध्यान सिर्फ पुणे-बारामती और पश्चिम महाराष्ट्र के विकास पर केंद्रित था। वहां सिंचाई की उत्तम व्यवस्था रहने से किसान वर्ष में 3 फसलें लेते रहे और खुशहाल सी।

विदर्भ की खेती वर्षा पर निर्भर रही, क्योंकि यहां की सिंचाई योजनाएं ठंडे बस्ते में डाल दी गई। गोसीखुर्द योजना स्व। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते शुरू की गई। तब से कई प्रधानमंत्री हो गए लेकिन उसकी प्रगति रुकी रही। कटु सत्य है कि विदर्भ की सिंचाई योजनाओं के लिए निर्धारित धनराशि कृष्णा घाटी सिंचाई योजना के लिए हस्तांतरित कर दी गई। सरकार पश्चिम महाराष्ट्र के गन्ना व अंगूर की पैदावार करने वाले किसानों के प्रति मेहरबान थी और विदर्भ के कपास व हुअर उत्पादक किसानों के लिए सौतेला रवैया रखती थी।

जल संवर्धन से रुकेगी किसान आत्महत्या : गडकरी

कृषि, सिंचाई उद्योग, रोजगार शिक्षा हर क्षेत्र में विदर्भ का पिछड़ापन या वैकलॉग बढ़ता चला गया। जब महाराष्ट्र में महायुति की सरकार आई, तब विदर्भ को न्याय मिलने की उम्मीद जागी। अब गडकरी ने जलक्रांति परिषद में राज्यभर से आए सांसदों, विधायकों, सरपंचों व ग्राम पंचायत सदस्यों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में पानी की एक-एक बूंद को संभालकर संचित करने के लिए कार्य करें। जल संवर्धन ही किसान आत्महत्याओं को रोकने की कुंजी है। हर गांव में नदी को गहरा करने, उसकी चौड़ाई बढ़ाने और जल संग्रहण का जनआंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया।

जल संरक्षण पर गडकरी, किसानों के साथ नाना पाटेकर

नितिन गडकरी ने जलसंवर्धन के लिए पूर्ति फाउंडेशन व्दारा विकसित तमसवाडा पैटर्न का उल्लेख किया, जिसे केंद्रीय भूजल बोर्ड तथा नीति आयोग के विशषज्ञों ने भी मान्यता दी है। पूर्ति फाउंडेशन के विभिन्न प्रयासों से 26 लाख घनमीटर वर्षाजल संग्रहित किया गया है। इस फाउंडेशन का कार्य महाराष्ट्र के 1,100 गांवों तक फैला है।

लोग बारिश के पानी को बचाएं, क्योंकि वही हमें बचा सकता है। यदि जल संरक्षण गंभीरता से लिया गया, तो विदर्भआत्महत्या मुक्त हो सकता है। एक दशक से 'नाम' फाउंडेशन शुरू करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर ने कहा कि किसानों की दुर्दशा ने जीवन के प्रति उनकी मानसिकता बदल दी। फिल्मी दुनिया से हटकर वह ग्रामीण समुदाय के कर्ज, सुखा व फसलों की अनिश्चितता की चिंता करने लगे। वह ग्रामीण समुदायों के पास काम कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि यदि मन में खुदकुशी करने का विचार आए तो मुझे फोन करें। में मदद के लिए तैयार हूं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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