नवभारत संपदाकीय: वंदे मातरम् पर विवाद क्यों? असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति पर तंज

Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम् के 2 या 6 अंतरे गाने को लेकर जारी विवाद पर निशानेबाज ने सवाल उठाए हैं। लेख में महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया गया है।
Amit Shah's statement on the Vande Mataram controversy
वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह बयानफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Vande Mataram Political Controversy: सरकार बड़ी सफाई से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी जवाबदेही टालती है। वह कोई ऐसा रूपक रचती है जिसमें विपक्ष उलझ जाए ओर असली समस्याओं से देशवासियों का ध्यान बट जाए। पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था का बंटाढार अर्थव्यवस्था की कमजोरी, चंदा चोरी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, जर्जर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि से जुड़े मुद्दे, कानून-व्यवस्था का प्रश्न सब एक तरफ रह गए।

इस समय वंदे मातरम् को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी। चंदे मातरम को राष्ट्रगान जनगणमन के बराबर दर्जा देना अत्यंत उचित है लेकिन अब इसे लेकर सरकार जोर दे रही है कि वंदे मातरम के पूरे 6 अंतरे गाए जाने चाहिए, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तो यह भी कह दिया कि वंदे मातरम के केवल प्रारंभिक 2 अंतरे गाना देशद्रोह है। दूसरी ओर कांग्रेस का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि 1937 के अपने प्रस्ताव के अनुरूप पार्टी ने 2 अंतरे या छंद गाने का फैसला किया है।

वंदे मातरम् पर सियासत, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 29 अक्तूबर 1937 को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदेमातर के सिर्फ 2 छंद गाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। उस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाषचंद्र बोस व गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर उपस्थित थे। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् के 2 छंद गाने का फैसला स्वयं टैगोर की सलाह पर लिया गया था।

जब महात्मा गांधी और टैगोर को आपत्ति नहीं हुई तो बीजेपी क्यों इस पर बवाल मचा रही है जिसका उस जमाने में अस्तित्व ही नहीं था? सरकार चाहती है कि जेनजी के आंदोलन व निहत्थे छात्रों पर पैलेट गन दागने के मामले परिप्रेक्ष्य में चले जाएं। वंदे मातरम् पर सारा ध्यान केंद्रित हो जाए, अमित शाह जोरशोर से कह रहे हैं कि कांग्रेस ने न केवल बंकिम बाबू की रचना का बल्कि उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। कांग्रेस की आज भी आधिकारिक नीति तुष्टिकरण ही है।

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वंदे मातरम् विवाद में सियासत, जनमुद्दे पीछे छूटे

बीजेपी नेता स्पाट तौर पर नहीं बोल रहे हैं लेकिन उनका आशय यही है कि मुस्लिम नेताओं को वंदे मातरम् के बाकी अंतरे गाने पर आपत्ति थी इसलिए कग्रिस ने इसका संक्षिप्त रूप स्वीकार किया। कुछ ने कहा था कि उनका मजहब खुदा को छोड़कर किसी के सामने सर झुकाने के लिए मना करता है लेकिन दूसरी ओर एआर रहमान ने भी तो गाया था मां तुझे सलाम। इस विवाद को इतना तूल दिया जा रहा है कि जनजीवन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।

वंदे मातरम के 2 छंद मातृभूमि के सौंदर्य, सृजनशक्ति, उसकी जलसंपदा और हरीतिमा का वर्णन करते हैं। बाद के 4 छंदों में वह मूर्तिमान देवी के रूप में वर्णित को जाती है। दस शस्त्रों वाली दुर्गा, कमल पर विराजमान लक्ष्मी तथा विद्याप्रदायिनी सरस्वती बताई जाती है। संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष डा। राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को घोषणा की थी कि वंदे मातरम् के प्रारंभिक 2 अंतरे राष्ट्रीय गीत रहेंगे।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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