निशानेबाज: ट्रंप को कुछ हुआ तो मैं तैयार, प्रेसीडेंट बनने को वान्स बेकरार

Vice President of America: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वान्स ने कह दिया कि यदि ट्रंप को कुछ हो जाता है तो वह उनकी जगह राष्ट्रपति पद संभालने के लिए तैयार हैं।
ट्रंप को कुछ हुआ तो मैं तैयार
ट्रंप को कुछ हुआ तो मैं तैयार (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, कितनी विचित्र बात है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वान्स ने कह दिया कि यदि ट्रंप को कुछ हो जाता है तो वह उनकी जगह राष्ट्रपति पद संभालने के लिए तैयार हैं।क्या यह किसी का बुरा चाहने जैसी अशुभ या अभद्र बात नहीं है?’ हमने कहा, ‘वान्स जिंदगी में चान्स लेना चाहते हैं।इसलिए एडवांस में उन्होंने अपने मन की इच्छा खुल कर व्यक्त कर दी।इसे किसी नेता का व्यावहारिक दृष्टिकोण या प्रैक्टिकल एप्रोच माना जा सकता है।उनका आशय है कि अमेरिका के नागरिकों बेफिक्र रहो।मैं सेकंड इन कमांड के रूप में किसी भी इमरजेंसी के लिए मौजूद हूं।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जॉन एफ केनेडी की डलास में हत्या होने के तुरंत बाद वाइस प्रेसिडेंट लिंडन बेन्स जानसन ने उड़ते हवाई जहाज में बाइबिल पर हाथ रखकर अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।ऐसी स्थिति के लिए तैयार रहना पड़ता है क्योंकि अमेरिका में राष्ट्रपति पद जरा भी देर खाली नहीं रखा जा सकता।अब हम सोच रहे हैं कि यदि जेडी वान्स प्रेसीडेंट बन गए तो व्हाइट हाउस में फर्स्ट लेडी उषा वांस भारतीय मूल की होंगी।हो सकता है कि तब अमेरिका और भारत के संबंधों का नया उषाकाल या नया सवेरा शुरू हो जाए।’

हमने कहा, ‘आगे आप यह भी कहेंगे कि जेडी वान्स एक रिस्पांसिबल फैमिलीमैन हैं जो भारत यात्रा के दौरान अपनी पत्नी, 2 बेटों और 1 बेटी के साथ प्रधानमंत्री मोदी के निवास पहुंचे थे।उनके बच्चों ने बंद गला वाला भारतीय कोट पहना था।ऐसी पारिवारिक भेंट हुई थी कि वान्स के बच्चों ने मोदी को ग्रैंड पा या नाना कह दिया।मोदी भी ऐसे प्रेम से मिले मानो अपनी बेटी और नातियों से भेंट हुई हो।उन्होंने इन बच्चों को अपने पालतू मोर दिखाए जिन्हें देखकर इन बच्चों ने वन्स मोर कहा होगा।वान्स दंपति ने मोदी के साथ पारिवारिक फीलिंग का आनंद लिया था.’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, ऐसे भ्रम में मत रहिए।कोई भी विदेशी नेता पहले अपने देश का हित देखता है।माय फ्रेंड मोदी कहनेवाले ट्रंप का रवैया आप देख ही रहे हैं।दोस्त-दोस्त ना रहा, प्यार-प्यार ना रहा!’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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