

ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ माफ किया, जिससे भारत को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई।
लेख में टैरिफ हटाने के फैसले को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और घरेलू महंगाई से जोड़ा गया।
रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने नाराजगी जताई।
टैरिफ में बदलाव के बाद भारत के लिए रूस से तेल खरीदने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
Trump Tariff Exemption for India Russia Oil: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा डा से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर लगाया गया 100 प्रतिशत टैरिफ माफ कर दिया। इससे भारत को लाभ होगा। क्योंकि वह रूसी क्रूड ऑयल का बड़ा खरीदार है। भारत ने पहले भी इस तरह के अन्यायपूर्ण टैरिफ को लेकर अपनी चिंता जताई थी और कहा था कि वह अपनी जरूरतों के लिए सिर्फ रूस ही नहीं, अन्य स्रोतों से भी तेल खरीदता है, जहां वह वाजिब दाम में उपलब्ध है।
भारत व चीन पर अमेरिका ने यह प्रतिबंध 'लिंडसे ओ ग्राहम एक्ट' के जरिए लगाया था, जिस पर ट्रंप ने हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य रूस पर दबाव डालना था। इसमें कहा गया था कि भारत और चीन जब रूस से तेल खरीदते हैं तो उससे मिलने वाले धन से रूस को यूक्रेन पर हमला तेज करने में मदद मिलती है।
माना जाता है कि 3 नवंबर को अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में बहुमत जुटाने के उद्देश्य से ट्रंप ने टैरिफ वापस लिया है। उनका यह पीछे हटने का कदम पता नहीं कब तक जारी रहता है! शंका है कि चुनाव के साथ कहीं वह अपनी सनक में फिर से भारी टैरिफ न लगा दें। पिछले सप्ताह जब ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ डीजल खरीद समझौता किया, तभी से लग रहा था कि ट्रंप भारत को भी रियायत देंगे। अमेरिका रूस से 3 लाख टन डीजल तत्काल खरीद रहा है और इसके बाद नवंबर में भी 50 लाख टन डीजल खरीदेगा।
यह कदम अमेरिकी नागरिकों तथा किसानों को राहत देने के लिए उठाया गया है। किसानों को ट्रैक्टर, हार्वेस्टर कम्बाइन तथा अन्य कृषि उपकरणों के लिए सस्ता डीजल चाहिए, अमेरिका में ईंधन के दाम 4।60 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचे हैं इसलिए ट्रंप को रूस से डीजल खरीदना जरूरी हो गया! ट्रंप ने कहा भी कि यह फैसला उन्होंने देशहित में लिया है।
वास्तव में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की एक तिहाई सीटों के द्विवार्षिक चुनाव के पहले ट्रंप अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। ईरान से युद्ध के बाद से उसकी लोकप्रियता में गिरावट आ गई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध से विपरीत असर पड़ा है। वहां ईंधन कीमतों के साथ अन्य वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। एक ओर जहां पुतिन ने टैरिफ हटाने के फैसले को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए उसका स्वागत किया है वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इसे विश्वासघात निरूपित किया है और कहा कि ट्रंप इस तरह डीजल खरीदकर रूसी सेना के हमले को सीधी मदद कर रहे हैं।
यूरोप के देशों के लिए भी यह तय करना कठिन है कि वह जेलेंस्की को समर्थन दें या अपनी अर्थव्यवस्था संभालने के लिए रूस से टैरिफ मुक्त क्रूड ऑयल खरीदें। जहां तक भारत का सवाल है, वह अब बेखटके रूस से और अधिक तेल खरीद सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा