Navabharat Nishanebaaz: बढ़ी जवान रहने की चाह, ट्रंप-पुतिन विज्ञान की राह
Trump Health Report: ट्रंप और पुतिन की बढ़ती उम्र के बीच स्वास्थ्य, दीर्घायु और एंटी-एजिंग तकनीकों को लेकर चर्चा तेज है। विज्ञान के सहारे लंबी व स्वस्थ जिंदगी की कोशिशें वैश्विक बहस का विषय बन रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
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Putin Anti Aging Project: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमने शेर सुना था- उमर-ए-दराज मांग कर लाए थे चार दिन, दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में!’ हमने कहा, ‘शेर को जंगल में ही रहने दीजिए। जहां तक उम्र का सवाल है, ट्रंप और पुतिन जैसे नेता खुद को जवान रखने और अपनी उम्र बढ़ाने के लिए विज्ञान का सहारा ले रहे हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रंप का 3 पेज का मेडिकल मेमो जारी किया, जिसमें कहा गया है कि 14 जून को 80 वर्ष के होने जा रहे ट्रंप का दिल 66 वर्ष के व्यक्ति जितना स्वस्थ है। वह किसी युवा के समान चुस्त-दुरुस्त हैं। उन्हें ऐसी दवाएं दी जा रही हैं जिनसे कोलेस्ट्रोल कम होता है। उन्हें स्वास्थ्यवर्धक खाना खाने और व्यायाम कर वजन घटाने की सलाह दी गई है। जहां तक रूस के राष्ट्रपति पुतिन का मामला है, वह अमर होना चाहते हैं और जीन थेरेपी से बुढ़ापा रोकेंगे।
73 साल के पुतिन का 2.15 लाख करोड़ रुपए का अमरत्व प्रोजेक्ट है। उन्होंने पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा था कि इंसान अपने खराब अंगों को बदलकर अमरता हासिल कर सकता है। रूसी वैज्ञानिक इस दिशा में काम कर रहे हैं। पुतिन अपने को जवान रखने के लिए क्रायोथेरेपी इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए वह माइनस 112 डिग्री ठंडे पानी के चेंबर में बिना कपड़ों के खड़े हो जाते हैं। वह बछड़ों के टिशु से बनी पेप्डाडाइस का इंजेक्शन भी लेते हैं।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, हिरण्यकश्यप और रावण भी खुद को अमर मानते थे लेकिन काल ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। जिंदगी सार्थक होनी चाहिए, लंबी नहीं! व्हेल मछली, कछुए, मगरमच्छ भी 100 वर्ष या ज्यादा उम्र तक जिंदा रहते हैं। ज्यादा जीने और जवान बने रहने की इतनी लालसा क्यों होनी चाहिए? राजा भतृहरी को एक साधू ने ऐसा फल दिया जिसे खाकर व्यक्ति अमर हो सकता था। राजा ने अपनी प्राणप्रिया रानी को वह फल दे दिया। रानी ने खुद फल न खाकर अपने यार (आशिक) को दिया। आशिक ने वह फल ले जाकर वेश्या को दिया। वेश्या को लगा कि राजा सबका पालक है उसको जवान और अमर रहना चाहिए इसलिए वेश्या ने वही फल राजा को लाकर दिया। राजा पूरी बात समझ गए। उन्होंने कहा तृष्णा न जीर्णा, वयमेव जीर्णा। उम्र कितनी भी बढ़ जाए, भोगविलास की लालसा या तृष्णा कम नहीं होती।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
