निशानेबाज: रेवंत रेड्डी का राजनीतिक सफर, ABVP से जा पहुंचे कांग्रेस
सफल राजनेता अपना इतिहास नहीं बताते और पुरानी बातें छुपाते हैं लेकिन तेलंगाना के कांग्रेसी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपनी पूरी हिस्ट्री उजागर कर दी। जहां पर उन्होंने अपनी शुरूआत भाजपा के सानिध्य में होना बताया।
- Written By: दीपिका पाल
रेवंत रेड्डी का राजनीतिक सफर (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, आम तौर पर सफल राजनेता अपना इतिहास नहीं बताते।पुरानी बातें छुपाते हैं लेकिन तेलंगाना के कांग्रेसी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपनी पूरी हिस्ट्री उजागर कर दी।हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की आत्मकथा के विमोचन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, आंध्रप्रदेश के सीएम व टीडीपी नेता चंद्राबाबू नायडू के साथ रेवंत रेड्डी भी मौजूद थे।उसी समय मंच पर मोदी ने चंद्राबाबू से कहा कि आपके दोस्त यहां उपस्थित हैं।मोदी का इशारा रेवंत रेड्डी की ओर था।
इस पर रेवंत रेड्डी ने बेलौस अंदाज में कहा, कि मेरी स्कूली पढ़ाई बीजेपी में हुई।कालेज की पढ़ाई टीडीपी में हुई और अब मैं राहुल गांधी के लिए काम कर रहा हूं।इस तरह उन्होंने एक वाक्य में अपने दलबदल और निष्ठा परिवर्तन की पूरी दास्तान सुना दी।इस बारे में आपकी क्या राय है?’ हमने कहा, ‘रेवंत रेड्डी ने अपनी राजनीतिक यात्रा अ.भा।विद्यार्थी परिषद से शुरू की जो कि संघ परिवार का हिस्सा और बीजेपी का राजनीतिक स्कूल है।अभाविप में संगठन और अनुशासन के साथ राष्ट्रभक्ति की सीख दी जाती है।
वह कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई और कम्युनिस्टों के आल इंडिया स्टुडेंटस फेडरेशन को टक्कर देती रही है।स्व।अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस सभी अ.भा।विद्यार्थी परिषद में रह चुके हैं।ये सभी बीजेपी की राजनीति के चमकीले सितारों में शामिल हैं.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, रेवंत रेड्डी प्रैक्टिकल पॉलिटीशियन हैं।वह टीडीपी में चंद्राबाबू नायडू के साथ रहे।
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जब आंध्रप्रदेश और तेलंगाना एक दूसरे से अलग हो गए तो नए राज्य में चुनाव के बाद रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस का नेतृत्व संभाला और चीफ मिनिस्टर बन गए।कांग्रेस की तेलंगाना के अलावा कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में सरकारें हैं।मुद्दा यह है कि क्या नेताओं को अपनी निष्ठा और पार्टी बदलनी चाहिए?’ हमने कहा, ‘बीजेपी के शीर्ष नेता कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की बात करते थे लेकिन अब बीजेपी कांग्रेस युक्त हो गई है।देखिए न, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, अशोक चव्हाण, हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।चुनावी राजनीति को समझने वाले नेता उड़ती चिड़िया के पंख पहचानते हैं और अपना फायदा देखकर इधर से उधर पलटी मारते हैं।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
