नवभारत विशेष: ऑनर किलिंग के खिलाफ राष्ट्रीय कानून बनाएं, उत्तर भारत में ऐसी घटनाएं ज्यादा

Dalit Student Murder: टिहरी गढ़वाल में 18 वर्षीय दलित छात्र केतन लाल की कथित ऑनर किलिंग ने झकझोर दिया। दोस्ती से नाराज लड़की के परिजनों पर बेरहमी से पीटकर हत्या करने का आरोप है।
Navbharat Special: Enact a national law against honor killings; such incidents are more frequent in North India.
ऑनर किलिंग, टिहरी गढ़वाल, दलित छात्र, अंतरजातीय दोस्ती, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Uttarakhand Honor Killing Case: ऑनर किलिंग की 3 खबरें पढ़कर मन उदास हो गया-एक 12वीं कक्षा के 18 वर्षीय दलित छात्र केतन लाल की पिछले 6 माह से जिला टिहरी गढ़वाल में लंबगांव की एक सवर्ण जाति की लड़की से दोस्ती थी। लड़की के परिवार को इस दोस्ती पर आपत्ति थी। लड़की ने 7 जून की शाम को केतन लाल को फोन किया (या उससे कराया गया) और उसे अपने घर बुलाया। केतन लाल अपने एक दोस्त दिवाकर के साथ लड़की के घर गया और जैसे ही वह दोनों वहां पहुंचे तो लड़की के परिजनों ने दोनों लड़कों को एक कमरे में बंद करके पीटना शुरू कर दिया।

फिर लड़की के पिता यशबीर सिंह पंवार ने केतन के पिता को फोन करके कहा कि 'दोनों लड़कों की हत्या कर दी गई है, आकर शव ले जाए'। केतन के पिता तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे तो दोनों लड़के अधमरी स्थिति में पड़े हुए थे। उन्हें अस्पताल ले जाते हुए केतन ने अपने पिता को बताया कि उसके पैरों में कीलें भी ठोकी गई थीं। अस्पताल पहुंचते ही केतन का निधन हो गया, जबकि दिवाकर की जिंदगी बचाने का प्रयास किया जा रहा है। लड़की के पिता यशबीर व दादा विद्यादत्त पंवार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

दूसरी खबर उत्तर प्रदेश के जिला बागपत की है। जहां 7 जून को जब 23 वर्षीय शाहजान खान एक शादी से लौटते हुए अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए गया, तो लड़की के मामाओं शाहरुख, फरमान व इमरान ने उसे पकड़कर पहले तो खूब पीटा और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। अपराध छुपाने के लिए शव को एक कपड़े में लपेटकर मदरसे के पास पड़े खाली प्लॉट में फेंक दिया। जब 9 जून 2026 को शव बरामद हुआ और सीसीटीवी से अपराध का फुटेज सामने आया, तो तीनों हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया।

प्रेम संबंध का दुखद अंत, ऑनर किलिंग की घटनाओं पर फिर उठे सवाल

तीसरी खबर जिला फिरोजाबाद में शिकोहाबाद के मोहल्ला गर्दैया की बीए सेकंड इयर में पढ़ रही 18 वर्षीय छात्रा और नोएडा में प्लम्बर का काम कर रहे 19 वर्षीय अरुण कुमार कथेरिया के बीच प्रेम संबंध थे, छात्रा अपनी मां व छोटे भाई के साथ दो सप्ताह से मणिपुर में रह रही थी। वह अपने कपड़े लेने के लिए शिकोहाबाद आई, जहां उसकी मां व मामाओं ने उस पर दबाव डालकर अरुण को फोन कराया व उसे शिकोहाबाद बुलाया। अरुण के आने पर उसे लड़की के साथ एक कमरे में बंद करके जिंदा जला दिया गया। जली हुई गंभीर अवस्था में दोनों को आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया, जहां लड़की का 6 जून को और अरुण का 9 जून को निधन हो गया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डाटा के अनुसार 2019 व 2020 में ऐसी 25-25 हत्याएं दर्ज की गई।

ऑनर किलिंग के कई मामले दर्ज ही नहीं होते

2021 में इनकी संख्या 33 थी, 2022 में 18 और 2023 में 38 केस रिपोर्ट किए गए। समाज सेवियों के अनुसार, ऑनर किलिंग को आधिकारिक रिका में बहुत कम करके बताया जाता है। क्योंकि कानूनी शिकंजे से बचने के लिए परिवार ऐसे अपराधों पर दुर्घटना या आत्महत्या का पर्दा डालने में 'सफल' हो जाते हैं, स्वयं या पुलिस की मदद से।

केंद्रीय गृह मंत्रालय अंडर-रिपोर्टिंग को अतीत में स्वीकार कर चुका है कि आधिकारिक तौर पर एनसीआरबी हर साल 25-33 केस रिकॉर्ड करता है। कुछ क्षेत्र कड़ी पितृसत्तात्मकता व जातिप्रथा से बहुत अधिक प्रभावित हैं, विशेषकर उत्तर व उत्तर पश्चिम भारत (जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश व पंजाब)। हॉरर किलिंग इसलिए होती हैं, क्योंकि बहुत से परिवार अंतरजातीय विवाह, सगोत्र विवाह या अंतर धार्मिक विवाह को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।

उत्तर भारत में ऐसी घटनाएं ज्यादा

दकियानूसी पालकों को लगता है कि प्रचलित मान्यताओं को पार करके उनकी संतान ने उनके परिवार की 'इज्जत' को मिट्टी में मिला दिया है। विशिष्ट राष्ट्रीय कानून न होने की वजह से भी इस पर रोक नहीं लग पाई है। भारत के विधि आयोग ने ऑनर किलिंग मुद्दे के समाधान के लिए एक अलग स्पष्ट राष्ट्रीय कानून गठित करने की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक ऐसा किया नहीं गया है।

लेख- डॉ. अनिता राठौर के द्वारा

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