नवभारत संपादकीय: वांगचुक की रिहाई से उठते सवाल
Sonam Wangchuk Arrest: लद्दाख राज्य दर्जा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले सोनम वांगचुक को NSA से राहत मिली, 6 माह बाद रिहाई से कानून के दुरुपयोग पर सवाल उठे।
- Written By: अंकिता पटेल
Sonam Wangchuk NSA Case ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Navbharat Editorial Sonam Wangchuk NSA Case: अपनी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले नेताओं के खिलाफ कठोर कानूनों का मनमाना इस्तेमाल समस्या को सुलझाने की बजाय और पेचीदा बना देता है। केंद्र सरकार ने पर्यावरण की रक्षा और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग करने वाले कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगाए गए गंभीर आरोपों को हटाकर उन्हें रिहा कर दिया।
वांगचुक को सितंबर 2025 में बिना सोचे समझे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल में कैद कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने बांग्लादेश व नेपाल के समान नौजवान पीढ़ी (जेन जी) को भड़काकर विरोध प्रदर्शन करवाए थे। उनकी गतिविधियों को राज्य की सुरक्षा के खिलाफ पूर्वाग्रहयुक्त बताया गया था।
लद्दाख को संविधान की छठीं अनुसूची में शामिल कर राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर उन्होंने दिल्ली चलो यात्रा निकाली थी और 5 वीं बार अनशन पर बैठे थे। शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सोनम वांगचुक को 6 माह तक जेल में रखा गया।
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राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के अंतर्गत बगैर कोई आरोप लगाए किसी व्यक्ति को अधिकतम 1 वर्ष तक जेल में रखा जा सकता है। वांगचुक की गिरफ्तारी को आंदोलनकारियों की मौत से भी जोड़ा गया था। उन पर विदेश से संबंध रखने का आरोप भी लगाया गया, वांगुचक की पत्नी को अपने पति की रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
आखिर सरकार को समझ में आया कि लद्दाख की समस्याओं का हल अपनी संपर्क और बातचीत से हो सकता है। कठोर रवैया अपनाने से समस्या सुलझने की बजाय और जटिल होती चली जाती है जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्वस्थ लोकतंत्र के हित में हैं। संवाद से ही समस्या का समाधान खोजा जा सकता है।
संविधान के मूलाधिकारों में व्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व दिया गया है। नए केंद्र शासित प्रदेश लाख में आंदोलन को कुचलने तथा सख्ती दिखाने से शांति व सुव्यवस्था के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है।
राजनेताओं के निर्देश पर पुलिस सख्त कार्रवाई करती है। एनएसए जैसे कठोर कानून का काफी सोच विचार कर न्यायपूर्ण तरीके से और गिने-चुने मामलों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए बाधक है।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर याचिका पर 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन उनके पहले ही केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटाने का निर्णय ले लिया, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
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गीतांजलि ने अपने पति की रासुका के तहत हिरासत को गैरकानूनी, मनमाना और असंवैधनिक बताया था। सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में कहा कि वह अपने आंदोलन और सक्रियता से पीछे नहीं हटे हैं। उनका संघर्ष लद्दाख की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए था जो आगे भी जारी रहेगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
