Navabharat Nishanebaaz: मोबाइल एप हुए मेहरबान, जिंदगी हो गई बेहद आसान

Mobile App Convenience: स्मार्टफोन और ऐप्स ने जिंदगी आसान बना दी है। टैक्सी, खाना, खरीदारी से लेकर टिकट बुकिंग और बिल भुगतान तक, अब ज्यादातर काम घर बैठे मोबाइल से हो रहे हैं।
smartphone apps making life easier digital convenience column
नवभारत डिजाइन फोटो
Published on: 
Updated on: 

Smartphone Daily Life: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, एक वक्त ऐसा भी था जब रेडियो पर गीत सुनाई देता था- ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हटके जरा बचके, ये है चॉम्बे मेरी जर्जा। अब ऐसा वक्त आ गया जिसमें जौना बहुत आसान हो गया है। घर बैठे एप पर क्लिक करो और टैक्सी या ऑटी बुलवा लो। भूख लगी है तो जो चाहे तुरंत मंगवा लो। सब्जी, मिठाई, फरसाण, दूध, दही, ग्रॉसरी खरीदने धूप में निकलने की जरूरत नहीं, हर चीज मोबाइल से बुलवा लो। नल टपक रहा है, या बिजली गुल है तो कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं, प्लंबर या इलेक्ट्रशियन को मिनिटों में बुला सकते हैं। मनचाही ड्रेस या शू मोबाइल पर पसंद करो, तुरंत हाजिर हो जाएगा। बस, ट्रेन, हवाई जहाज की टिकट बुकिंग, होटल में रूम बुकिंग व फंड ट्रांसफर में मोबाइल मददगार है। जो काम कभी अलादीन का जादुई चिराग करता था वह अब स्मार्टफोन करने लगा है।'

हमने कहा, 'इतना ही नहीं अब तो बरतन मांजने, घर में झाड़ लगाने, गार्डन में सिंचाई करने, कार धोने, कुत्ते को घुमाने के लिए भी डोमेस्टिक हेल्प को एप से बुलवा लो। धोबीकाका ऐप कपड़े धोकर प्रेस करके ऐसी बड़िया पैकिंग में लाकर देगा जैसे आप अभी स्टोर से नई ड्रेस खरीदकर लाए हैं।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, भरपूर पैसा हो तो हर काम घर बैठे हो जाता है। ब्लड टेस्ट कराने पैथालाजी लैब जाने की जरूरत नहीं। टेक्नीशिवन घर आकर सैंपल लेगा और मोबाइल पर पूरी हेल्थ रिपोर्ट आ जाएगी। लंबी लाइन में खड़े रहने की बजाय आप तमाम बिल ऑनलाइन भर सकते हैं। सन 2000 में आपने कल्पना भी नहीं की होगी कि लाइफ इतनी इजी गोइंग या आसान हो जाएगी। ऐसी सुविधाएं तो बादशाह अकबर या सम्राट अशोक के पास भी नहीं थीं। शापिंग के दौरान डेर सारे बैग उठाना संभव नहीं है तो उसके लिए भी एप है। आपका सारा सामान बड़ी हिफाजत से घर पहुंच जाएगा। गिग वर्कर को काम और आपको पूरा आराम! हर चीज की आउटसोर्सिंग हो गई है। इतनी सुविधाजनक जिंदगी इंसान को निकम्मा या निठल्ला बना देगी। आरामतलब होने के बाद आप कहेंगे- अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live
navbharatlive.com