Navabharat Nishanebaaz: जब तक है दुनियादारी हर किसी पर जिम्मेदारी, मोदी और शाह पर आखिर कितना दबाव?

SIR Voter List Responsibility:'निशानेबाज' ने जिम्मेदारियों के बहाने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर सियासी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मोदी के कंधे पर पूरे देश की जिम्मेदारियों का बोझ है।
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निशानेबाजसोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो
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SIR Voter List Political Responsibility: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हम जिम्मेदारियों का बोझ उठाते-उठाते थक गए हैं। सोचते हैं कि अपनी रिस्पॉन्सिबिलिटी का बोझ किसी और पर डाल दें।'

हमने कहा, 'ऐसा नहीं चलेगा। जब तक आपका नाम एसआईआर से कटकर मतदाता सूची से बाहर नहीं हो जाता, आप एक रिस्पॉन्सिबल सिटीजन या जिम्मेदार नागरिक बने रहेंगे। जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होतीं।

श्रवण कुमार ने जिम्मेदारी के साथ अपने माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर तीर्थयात्रा करवाई थी। आज भी कांवड़िया अपने कंधे पर कांवड़ लादकर धूमधाम से गंगाजल लाते हैं।

प्रधानमंत्री के कंधे पर पूरे देश की जिम्मेदारियों का बोझ है। ऊपर से विपक्ष चाहता है कि सरकार जंतर-मंतर पर गोली चलाने की रिस्पॉन्सिबिलिटी भी अपने ऊपर ले। मोदी और शाह पर आखिर कितना दबाव डाला जाएगा?'

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पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमें दूसरों से मतलब नहीं है। हम अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं।'

हमने कहा, 'जब तक दुनियादारी है, तब तक जिम्मेदारी भी है। जमादार से लेकर जमींदार तक अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, बड़े-बड़े उद्योगपतियों से भी कहा जाता है कि सीएसआर यानी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी निभाओ।

इसका मतलब है कि पहले जिम्मेदारी से बिजनेस करते हुए बहुत बड़ी कंपनी अर्थात कॉरपोरेट बनाओ फिर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाओ। अपने मुनाफे का एक हिस्सा समाज कल्याण के कार्यों में खर्च करो। तुमने समाज से कमाया तो समाज को दो। इससे जिम्मेदारी और वफादारी दोनों निभजाती है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, कितने ही लोग निष्क्रय या निठल्ले बने रहते हैं। उनका रवैया ऐसा रहता है- अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम!'

हमने कहा, 'अब आप समझ गए होंगे कि तथाकथित जिम्मेदार लोगों ने राममंदिर का चंदा या चढ़ावा कैसे चुराया। धर्म के नाम पर धंधा करने वालों की जमात सामने आ गई। आज धर्म और राजनीति का घालमेल हो गया है, महंगाई, बेरोजगारी जनता का तेल निकाल रही है। इतनी ज्यादा डिफिकल्टी बढ़ गई कि पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करना युवाओं की रिस्पॉन्सिबिलिटी बन गई।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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