

Sehore Hospital Factor A Injection Available: मध्यप्रदेश के सीहोर जिला अस्पताल के बाहर आज एक हृदयविदारक मंजर देखने को मिला इलाज की आस में भटक रहे एक बेबस पिता श्रवण कुमार मेवाड़ा, अपने मासूम बच्चों को लेकर अस्पताल के ठीक सामने धरने पर बैठ गए हैं उनके बच्चे एक बेहद गंभीर और खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसका खर्च उठा पाना इस गरीब परिवार के लिए असंभव साबित हो रहा है।
पीड़ित पिता श्रवण कुमार का कहना है कि उनके बच्चों को जीवित रखने के लिए 'फैक्टर-ए' नाम के एक विशेष इंजेक्शन की सख्त जरूरत है। इस एक इंजेक्शन की कीमत बाजार में लगभग 22,000 रुपये है, जिसे हर 21 दिन के अंतराल पर बच्चों को लगाना अनिवार्य है।
श्रवण कुमार ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और कहा कि मैं एक बेहद गरीब और असमर्थ पिता हूं। हर 21 दिन में इतनी भारी-भरकम राशि जुटाना मेरे बस से बाहर है। अगर बच्चों को समय पर इंजेक्शन नहीं मिला, तो उसकी जान को खतरा है।
हैरानी और प्रशासनिक लापरवाही की बात यह है कि यह महंगा इंजेक्शन सीहोर जिला अस्पताल के सरकारी कोटे में उपलब्ध है। सरकार द्वारा गरीबों के लिए चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इसे मरीजों को मुफ्त या रियायती दरों पर दिया जाना चाहिए। लेकिन पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हफ्तों से चक्कर काटने के बाद भी बच्चों को इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे तंग आकर उन्हें अस्पताल के सामने ही बैठना पड़ा।
यह मामला जिला अस्पताल के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को साफ उजागर करता है। जब जीवन रक्षक दवाएं अस्पताल में मौजूद हैं, तो एक गरीब परिवार को इस तरह सड़कों पर बैठने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लें और बच्चों को तुरंत 'फैक्टर-ए' इंजेक्शन मुहैया कराएं। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।