नवभारत निशानेबाज: फिर आ गई चुनाव की घड़ी, नेता बांटेंगे वोटर को रेवड़ी

Election Freebies Debate: चुनावी राजनीति में धर्म और मुफ्त योजनाओं के बीच खींचतान पर व्यंग्य। लेखक कहता है कि कुछ राज्यों में रामनाम नहीं, बल्कि रेवड़ी की राजनीति जनता को ज्यादा आकर्षित करती है।
Navbharat Sharpshooter: The Hour of Elections Has Arrived Once Again; Leaders Will Hand Out Freebies to Voters.
Freebies in State Elections ( Source: Social Media )
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Freebies in State Elections: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज पहले धर्म प्रेमी लोग कहते थे रामनाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंतकाल पछताएगा, प्राण जाएंगे छूट! हमने कहा, '5 राज्यों में चुनाव के दौरान बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में रामनाम की लूट नहीं चलेगी। वहां की जनता रेवड़ी की लूट पसंद करेगी। रेवड़ी पाकर खुश होनेवाली पब्लिक कहती है- प्यार का बंधन जनम का बंधन, ये बंधन टूटे ना। जनता जनार्दन को मुफ्त में नगदनारायण मिल जाए तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, सभी जानते है कि रेवड़ी चुनावी राजनीति का अभिन्न अंग है। गुरु खानेवाला गुलगुले से परहेज कर सकता है लेकिन तिल के लड्डू खानेवाला कभी रेवड़ी से परहेज नहीं करता ! राजनीतिक पार्टियों का गठजोड़ बेमेल हो सकता है लेकिन चीनी और तिल के गठबंधन से तैयार होनेवाली गुलाबजल पड़ी सुगंधित रेवड़ी का कहना ही क्या। रेवड़ी भी। मतदाताओं के झुंड या रेवड़ को अपनी ओर आकर्षित करना है तो मीठे और लुभावने वादों की रेवड़ी बांटो। रात के अंधेरे में चुपचाप अपने कार्यकर्ताओं के जरिए भेटवस्तु या उपहार बांटे जाते हैं। गरीब मतदाता रतजगा करते हुए इसकी प्रतीक्षा करते हैं। मतदाता के सामने ऑफर रहता है- यार दिलदार तुझे कैसा चाहिए, प्यार चाहिए कि पैसा चाहिए? किसी की एक भी बहन नहीं होती लेकिन नेता एक झटके में लाखों लाड़ली बहन बना लेता है। कोई सारे प्रदेश का मामा बनकर भानजियों की फिक्र करता देखा गया है।

प्रेम-स्नेह जताने के साथ कोई खाते में पैसा भी डाल दे तो इससे बढ़िया चात क्या हो सकती है, ऑफर देनेवाले कहते हैं कि हमारी रेवड़ी का साइज दूसरे की रेवड़ी से बड़ा है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा दिया था तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। आज के नेता कहते हैं- तुम मुझे बोट दो, मैं तुम्हें रेवड़ी दूंगा। खबरों में कभी रईसजादों या फिल्मी सितारों की रेव पार्टी छाई रहती है तो चुनाव आते ही रेवड़ी चर्चित हो जाती है। रेवड़ी को लेकर हिंदी में कहावत है अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपने को दे।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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