संपादकीय: राज्यसभा चुनाव के लिए सामाजिक समीकरण, महाराष्ट्र में आदिवासियों-धनगर समाज को साधने की BJP की रणनीति
Rajya Sabha Election: लोकसभा चुनाव में विदर्भ की हार से सबक लेते हुए BJP ने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन किया। माया इवनाते और रामराव वडकुते के जरिए पार्टी ने जातिगत समीकरणों को साधा है।
- Written By: आकाश मसने
रामदास आठवले, विनोद तावड़े, माया ईवनाते व रामराव वडकुते (डिजाइन फोटो)
BJP Social Engineering In Maharastra: ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में बीजेपी ने सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास किया है। लोकसभा चुनाव में विदर्भ में बीजेपी को झटका लगा था। आदिवासी मतदाताओं ने जंगल, जमीन का हक तथा आरक्षण छिन जाने की आशंका जैसे मुद्दों की वजह से बीजेपी के खिलाफ मतदान किया था। तब बीजेपी को विदर्भ की 10 लोकसभा सीटों में से सिर्फ नागपुर और अकोला की 2 सीटों पर सफलता मिल पाई थी। बुलढाणा में शिवसेना (शिंदे) को सफलता मिली। इस तरह महायुति की 3 सीटें हो गई थीं।
विदर्भ में बीजेपी को मिली थी हार
विदर्भ में गड़चिरोली-चिमूर, भंडारा-गोंदिया, चंद्रपुर, यवतमाल व अमरावती के आदिवासी वोट निर्णायक होने से वहां बीजेपी हार गई थी। इसे देखते हुए आदिवासी समाज को साधने के उद्देश्य से बीजेपी ने राज्यसभा के लिए नागपुर की पूर्व महापौर तथा इस समय मनपा की अग्निशमन समिति की सभापति माया इवनाते को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह बीजेपी ने 3 वर्ष बाद होने वाले लोकसभा चुनाव को निगाह में रखकर धनगर-हटकर समाज का विचार करते हुए मराठवाडा के हिंगोली से रामराव वडकुते को प्रत्याशी बनाया है। वडकुते मूल रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता थे। महाविकास आघाड़ी सरकार के समय पार्टी ने उन्हें भेड़-बकरी महामंडल का अध्यक्ष पद और विधानपरिषद की सदस्यता दी थी। बीजेपी में शामिल होने के बाद वह पार्टी का कार्य करते रहे। उन्हें राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर बीजेपी ने सामान्य कार्यकर्ताओं को अवसर दिया है।
दलित और मराठा काे भी नेतृत्व
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रामदास आठवले व बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे को भी राज्यसभा का टिकट देकर पार्टी ने दलित, मराठा, आदिवासी, ओबीसी सभी को संतुष्ट किया है। आठवले को फिर मौका दिया गया है। इसके पहले भी बीजेपी ने नागपुर के डाॅ. विकास महात्मे तथा पिंपरी के अमर साबले को राज्यसभा सांसद बनाकर धनगर व दलित वर्ग को अवसर दिया था। अब फिर से ऐसी ही सोशल इंजीनियरिंग की गई है। किसी समाज को साथ जोड़ने के लिए बीजेपी उसके किसी नेता को उम्मीदवारी देती है।
सम्बंधित ख़बरें
बंगाल में महा-परिवर्तन या ममता का चौका? 92% से अधिक बंपर वोटिंग और ग्रहों की चाल दे रही है ये बड़े संकेत!
नागपुर: वर्धमान नगर में 151 करोड़ का 4-लेन ROB तैयार, ट्रैफिक जाम से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति, देखें VIDEO
BMC में सत्ताधारी दल को बड़ा झटका; पार्षदों की गैरमौजूदगी से वडाला और दादर पुनर्विकास प्रस्ताव खारिज
राजस्थान के श्रीगंगानगर में अधिकारियों की दबंगई, 58 वर्षीय BJP विधायक को पीटा; जनसुवाई के दौरान हुआ हमला
यह भी पढ़ें:- नवभारत विशेष: जॉर्ज, शरद, लालू और अब समाजवादी नीतीश, बिहार में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत
देशभर में 37 राज्यसभा सीटों पर होगा चुनाव
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए देश भर में चुनाव हो रहे हैं। सर्वाधिक 7 सीटें महाराष्ट्र से हैं। इसके अलावा तमिलनाडु से 6, बिहार और बंगाल से 5-5, ओडिशा से 4 सीटें हैं। गत वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शानदार जीत की वजह से महायुति के पास 6 राज्यसभा सांसद निर्वाचित करने की क्षमता है। इनमें से 4 सीटों पर बीजेपी चुनाव लड़ रही है। शिंदे सेना व दिवंगत अजित पवार की एनसीपी को 1-1 जगह मिली है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार राज्यसभा छोड़कर राज्य की राजनीति में आ गई हैं इसलिए वह सीट पार्थ पवार को दिए जाने की संभावना है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना राहुल शेवाले को प्रत्याशी बना सकती है। आघाड़ी कायम रहे, इसलिए वरिष्ठ नेता शरद पवार को समर्थन देने की भूमिका कांग्रेस ने अपनाई है। उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
