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नवभारत डेस्क: विपक्ष का नेता बनने के बाद राहुल गांधी नए जोश, आत्मविश्वास और सधी हुई रणनीति के साथ सरकार पर टूट पड़े हैं। अवश्य ही बीजेपी को उनके बोल मर्यादाहीन व अपमानजनक लग रहे होंगे लेकिन हाथ आए अवसर का राहूल पूरा लाभ उठा रहे हैं। पिछली 2 लोकसभाओं में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली था। तब बीजेपी के भारी बहुमत की वजह से विपक्ष की आवाज अनसुनी की जाती थी या बोलने से रोक दिया जाता था। ऐसी स्थिति में सदन से बहिर्गमन करने के अलावा विपक्ष के पास कोई रास्ता नहीं था। अब अधिकृत रूप से विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी कैबिनेट मंत्री के दर्जे की सुविधाओं के पात्र हैं। उन्हें भाषण के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है।
बीजेपी नेता भी तो राहुल को पप्पू, शहजादे कहते रहे हैं। बीजेपी के प्रचार तंत्र ने सुनियोजित ढंग से उन्हें ‘नासमझ’ बताने की पूरी कोशिश की थी। पिछली बार उनकी संसद सदस्यता भी छीनी गई थी। नामी उद्योगपतियों से प्रधानमंत्री मोदी की निकटता को लेकर राहुल गांधी पहले भी आरोप लगाते रहे हैं। इस बार उन्होंने छौंक-बघार कुछ ज्यादा ही लगा दी और बीजेपी की दुखती रग पर प्रहार किया। 6 लोगों के चक्रव्यूह की उपमा देकर उन्होंने सत्तापक्ष को तिलमिला दिया।
लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें टोका कि नियमानुसार राहुल उन लोगों का नाम नहीं ले सकते जो सदन में नहीं हैं। बजट की आलोचना करते हुए राहुल ने कहा कि इसे 2-3 प्रतिशत लोगों के लिए हलवा बना दिया गया जबकि शेष भारत को चक्रव्यूह में फंसा दिया गया। उनका आरोप है कि सरकार बड़े लोगों के हाथों में देश की संपत्ति व ताकत देना चाहती है। बजट बनानेवाले आईएएस अधिकारियों में एक भी दलित, पिछड़ा या आदिवासी नहीं था।
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बीजेपी मुट्ठी भर उद्योगपतियों और समाज के उच्चवर्णीयों की हितरक्षा करनेवाली पार्टी है। अवश्य ही सरकार राहुल की बातों को ‘फेक नैरेटिव’ बताएगी। इसके बावजूद राहुल बार-बार अंबानी-अदानी से पीएम व अमित शाह की निकटता को दोहराते रहे हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लपेटा, उसे लोग अवांछित ही मानेंगे।
भाषण में व्यक्तियों की बजाय नीतियों और तथ्यों का उल्लेख करते हुए दलीलें दी जानी चाहिए लेकिन विपक्ष के नेता पहले भी व्यक्तिगत आलोचना करते रहे हैं। डा। राममनोहर लोहिया ने पं। नेहरू की शेरवानी पर तंज कसते हुए उसे शाहजहां के तबलची की पोशाक कहा था। राजनारायण की इंदिरा गांधी पर की गई टिप्पणियां भी सुरूचिपूर्ण नहीं थीं। पिछले दिनों विपक्ष के तीखे आलोचनात्मक प्रहार से क्षुब्ध होकर प्रधानमंत्री ने कहा था कि विपक्ष 2 घंटे तक उनका गला घोंटता रहा। इस बार विपक्ष के तेवर सचमुच तीखे और सरकार को परेशानी में डालनेवाले हैं। लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा