नवभारत निशानेबाज: खून-खराबे से भरा रमजान, पाक के निशाने पर तालिबान
Pakistan Taliban Conflict: रमजान के बीच तालिबान पर पाकिस्तान के हमले से तनाव बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि इस टकराव का जवाब पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है।
- Written By: अंकिता पटेल
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Pakistan Taliban Airstrikes: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, इस्लाम में रमजान के महीने को बहुत पाक या पवित्र माना जाता है, जिसमें अमन-चैन, भाईचारा बना रहना चाहिए लेकिन पाकिस्तान को न जाने क्या सुझा, उसने तालिबान पर खुनी हवाई हमला कर दिया। यदि जवाब में तालिबान जमकर ठोकेगा तो पाकिस्तान की मदद के लिए चीन या अमेरिका नहीं आएंगे।’
हमने कहा, ‘असरानी की एक फिल्म का नाम था चला मुरारी हीरो बनने। इसी तरह पाकिस्तान चला अमेरिका बनने! तालिबान ने जब रूसी फौजों को करारी टक्कर दी और अमेरिका के काबू में भी नहीं आया, तो उसके सामने पाकिस्तान क्या चीज है। वहां के लड़ाके पाकिस्तान की नाक में दम कर देंगे। पाकिस्तान इतना नादान है कि बिच्छू का मंत्र जानता नहीं और चला है सांप के बिल में हाथ डालने! उसे अपनी औकात समझनी चाहिए थी। बलूचों व तालिबानियों से दुश्मनी पाक को बहुत महंगी पड़ेगी।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, पाकिस्तान को लगता है कि सऊदी अरब उसकी मदद के लिए आगे आएगा लेकिन अरब देश खुद ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले से परेशान हैं। वह पाकिस्तान के लिए किसी से पंगा क्यों लेंगे?’
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हमने कहा, ‘पाकिस्तान ने काबुल के अस्पताल पर हवाई हमला कर 400 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। वह अस्पतालों, स्कूलों और मदरसों को निशाना बना रहा है। पाकिस्तान को अपनी फौजी ताकत का गुमान हो गया है। उसे लगा कि जैसे अमेरिका ईरान पर टूट पड़ा वैसे ही वह भी तालिबान को हमला करके डरा देगा। यह वही तालिबान है जिसे अमेरिका के पैसों और शखों से लैस कर पाकिस्तान की फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ट्रेनिंग दी थी और रूस की सेना से लड़वाया था। तब यह तालिबान लड़ाके मुजाहिदीन कहलाते थे। सिल्वेस्टर स्टॉलन की फिल्म रैम्बो में इनका युद्ध कौशल दिखाया गया है। इस समय तालिबान को रूस का समर्थन है। भारत के साथ भी तालिबान के संबंध ठीक बने हुए हैं। भारत ने पाकिस्तानी हमले को अफगानिस्तान की संप्रभुता पर आक्रमण बताया है। पहले ही तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) पाक के लिए सिरदर्द बना हुआ है और अब तो काबुल पर हमला कर पाकिस्तान ने अपनी मौत को दावत दी है। तालिबान सिर्फ तालियां नहीं बजाएगा बल्कि पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाकर रख देगा।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
