

उमर अब्दुल्ला सरकार 24 असंतुष्ट विधायकों की बगावत से संकट में है।
बागियों ने 4 मंत्रियों और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार को हटाने की मांग की है।
मांगें नहीं मानी गईं तो नेशनल कॉन्फ्रेंस टूट सकती है और सरकार अल्पमत में आ सकती है।
बीजेपी इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
Jammu Kashmir Government Political Crisis: जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार विधायकों की बगावत से जूझ रही है। गत 27 अक्टूबर को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार में अनेक वरिष्ठ विधायकों की उपेक्षा की गई इसलिए पार्टी के 24 असंतुष्ट विधायकों ने विरोधी तेवर अपना लिये, उनकी बैठक में 18 विधायक मौजूद थे और 6 ने अपनी वीडियो उपस्थिति दर्शाई।
बागी विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भेंट कर अपनी मांगें पेश की। उनकी प्रमुख मांग थी 4 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाया जाए तथा मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नासिर सोगामी को बर्खास्त किया जाए। असंतुष्टों ने उमर को फैसला लेने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया। यदि मुख्यमंत्री ने इन मांगों को नहीं माना तो सरकार के सम्मुख गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुल 41 में से 24 सदस्यों की बगावत रंग लाई तो उनके साथ सिर्फ 17 विधायक शेष रह जाएंगे। ऐसे में सरकार अल्पमत में आ जाएगी। श्रीनगर के सांसद सैयद आगा रहुल्ला मेहदी ने अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया है। इससे नेकां का संकट और बढ़ गया है। विधायक देख रहे हैं कि दिवाली के बाद मुख्यमंत्री कौन-सा निर्णय लेते हैं? क्या वह असंतुष्टों की नाराजगी दूर कर पाएंगे? इस दौरान बीजेपी 'देखो और प्रतीक्षा करो' की नीति पर चल रही है।
इस समय 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बीजेपी के पास 29 विधायक हैं। बहुमत के लिए 46 विधायकों की जरूरत है। इस तरह 17 विधायकों की कमी पड़ती है। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार 42 सीटों पर जीते थे। उमर अब्दुल्ला 2 सीटों पर चुनकर आए थे। उन्होंने एक सीट से इस्तीफा दिया जिस कारण पार्टी की सीटें 41 रह गई।
कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। उसके समर्थन से उमर अब्दुल्ला ने सरकार बनाई। महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के पास 3 सीटें हैं। उमर सरकार 2 वर्ष आसानी से चली, लेकिन अब उनकी पार्टी में असंतोष धधक रहा है। यदि यह 24 असंतुष्ट विधायक अपने साथ और 4 विधायकों को जोड़ लें, तो वह दो-तिहाई विधायकों का गुट बनाकर अलग हो सकते हैं।
अभी विधानसभा में 7 निर्दलीय विधायक हैं जिनमें से 4 उमर अब्दुल्ला अब्दुल्ला के साथ और 3 बीजेपी के साथ हैं। यदि नेकां टूट जाती है तो बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। जिस तरह महाराष्ट्र में शिवसेना टूटी, उसी तरह का खेल जम्मू-कश्मीर में भी हो सकता है। बीजेपी ने पहले भी राज्य में महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के साथ सरकार बनाई थी। तब बीजेपी सरकार बनाने में राम माधव ने भूमिका निभाई थी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा