नवभारत विशेष: भारतीयों का तेज रफ्तार रिवर्स माइग्रेशन, कनाडा-अमेरिका से हुआ मोहभंग!
NRI Reverse Migration: वैश्विक मंदी, कड़े वीजा नियम और बढ़ते नस्लवाद के कारण पिछले एक साल में लाखों अप्रवासी भारतीय (NRI) कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश छोड़कर वापस भारत लौट रहे हैं।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
NRI Reverse Migration To India: भारत तथा कनाडा के बिगड़ते कूटनीतिक रिश्तों के चलते हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर कनाडा छोड़कर, पिछले 12 से 14 महीने के बीच भारत लौटे हैं। अमेरिका में टेक सेक्टर में बढ़ी छंटनी, एच-1बी वीजा अनिश्चिताओं ने भी अप्रवासी भारतीयों की चिंता और असुरक्षा बढ़ाई है। जिन देशों से बड़े पैमाने पर भारतीय वापस आए हैं, इनमें से सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और ओमान हैं। इनकी वापसी के कारणों में तेल आधारित अर्थव्यवस्था में दबाव, युद्ध और क्षेत्रीय तनाव, श्रमिकों की छंटनी, वीजा नियमों की सख्ती रही है।
पिछले एक साल में 80 हजार से 1.5 लाख के आसपास भारतीय छात्र और अस्थायी कामगार कनाडा से भी लौटे हैं। इनके पीछे भी छात्र वीजा नियमों में की गई सख्ती, कनाडा में बढ़ती बेरोजगारी, परमानेंट रेजिडेंस की बढ़ती हुई समस्या और किराया तथा जीवनयापन कई गुना महंगा हो जाने के कारण इन भारतीयों की वापसी हुई है। लेकिन जहां तक अमेरिका का सवाल है, वहां से एक साल के भीतर 50 हजार से 1 लाख भारतीय वापस आए हैं या रिलोकेशन की प्रक्रिया में रहे हैं।
अमेरिका से हाई स्किल्ड कामगार ही वापस लौटे
अमेरिका से छात्रों की वापसी कम हुई है, ज्यादातर हाई स्किल्ड कामगार ही वापस लौटे हैं। इसकी वजह एच-1बी वीजा अनिश्चितता, ग्रीन कार्ड, टेक सेक्टर में ले ऑफ, एआई ऑटोमेशन बड़ा कारण हैं। सबसे आश्चर्यजनक रिवर्स माइग्रेशन ब्रिटेन से हुआ है। 2025 में 51 हजार भारतीय छात्र और 21 हजार से ज्यादा कामकाजी लोग लंदन सहित ब्रिटेन के कई शहरों से वापस भारत की तरफ लौटे हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण वहां बढ़ती कट्टरता और अप्रवासी भारतीयों के साथ स्थानीय लोगों की बेरुखी रही है। इतने बड़े पैमाने पर रिवर्स माइग्रेशन अब के पहले ब्रिटेन से कभी नहीं हुआ।
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भारत वापस क्यों आ रहे अप्रवासी?
इतने बड़े पैमाने पर आखिर अप्रवासी भारतीय दुनिया के विभिन्न देशों को छोड़कर भारत क्यों आ रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह एक तो स्थानीय लोगों में भारतीयों को लेकर बढ़ती नफरत और ईर्ष्या है, दूसरे नंबर पर दुनिया के लगभग सभी देशों में अर्थव्यवस्था के बिगड़ते हालात हैं और तीसरा बड़ा कारण यह है कि भारत में हाल के वर्षों में अवसर बढ़े हैं। विशेषकर जो आईटी प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, रिटायर्ड एनआरआई, रिमोट वर्कर्स और ग्लोबल इंडियन लौट रहे हैं। इनके पीछे भारत में हाल के दिनों में बढ़े अवसर भी हैं।
भारत के तमाम छोटे-छोटे शहरों में हाल के वर्षों में जिस तरह से डिजिटल तकनीक और आर्थिक अवसर बढ़े हैं, उस कारण अब युवा देश के कुछ गिने-चुने बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि में ही अपना भविष्य नहीं देख रहे बल्कि छोटे शहरों में भी अब उन्हें अपना भविष्य दिखाई पड़ने लगा है। भले यह अभी विदेशी जैसा आकर्षक विकल्प न हो, लेकिन अपने देश में रहने और कम खर्च में बेहतर बचाने की जुगत के कारण भी अब भारतीय विदेश से लौटकर देश में सेटल होने की कोशिश कर रहे हैं।
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देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी बेहतर स्कूल, को-वर्किंग स्पेस, कैफे कल्चर और डिजिटल सेवाएं तथा स्वास्थ्य सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। इस कारण भी अनिवासी भारतीय, भारत की तरफ वापसी का रुख कर रहे हैं। छोटे शहरों में जिस तरह के रोजगार, इंटरनेट, सार्वजनिक परिवहन आदि की सुविधाएं बढ़ी हैं साथ ही अवसरों की उपलब्धता भी बढ़ी है, वे स्थितियां भी अप्रवासी भारतीयों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
विदेश से होने लगा मोह भंग
कभी बेहतर भविष्य, कभी ऊंची तनख्वाहों और कभी स्थायी नागरिकता के सपनों के साथ दुनियाभर में फैले लगभग 3 करोड़ 54 लाख भारतवंशियों में से अब बड़ी तेजी से प्रवासी भारतीय ‘रिवर्स माइग्रेशन’ कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका जंग के कारण करीब 3 से 5 लाख प्रवासी भारतीय विभिन्न खाड़ी देशों से पिछले 4-5 महीने के भीतर लौटे हैं। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी पिछले एक साल में बड़े पैमाने पर प्रवासी भारतीयों ने रिवर्स माइग्रेशन का रुख किया है। वैश्विक राजनीति की बदलती जियोपॉलिटिक्स, मंदी का शिकार होती अर्थव्यवस्थाएं और बढ़ती बेरोजगारी के साथ-साथ विभिन्न देशों में कट्टरपंथ का उभार भी इस माइग्रेशन के पीछे एक बड़ा कारण है।
लेख- वीना गौतम के द्वारा
