Navabharat Nishanebaaz: भूल गए सारे आचार-विचार, किया भयंकर भ्रष्टाचार

Ram Temple Controversy: यह व्यंग्य लेख मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, चढ़ावे के प्रबंधन और जवाबदेही पर कटाक्ष करता है। लेख में सवालों और तंज के जरिए व्यवस्था पर टिप्पणी की गई है।
Navabharat Nishanebaaz: Forgot all the ethics, did terrible corruption
(साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Ram Temple Donation Row: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हिंदी में चंपत, रफूचक्कर और नौ दो ग्यारह जैसे शब्दों का एक ही अर्थ है। श्री रामजन्म भूमि ट्रस्ट के चंपत राय के लिए कहा जा सकता है- भोली सूरत दिल के खोटे, नाम बड़े और दर्शन छोटे। राममंदिर में केंद्रीय सुरक्षा बल, राज्य की पुलिस तैनात होने के बावजूद चंपत राय के लिए 400 निजी सुरक्षा गार्ड लगाए गए फिर भी सैकड़ों करोड़ रुपए के चढ़ावे का घोटाला हो गया। हीरे, सोने-चांदी के आभूषण जमीन खा गई या आसमान निगल गया? ये गार्ड उस रूट पर भी तैनात रहते थे जहां से पैसा बैंक जाता था। बीजेपी के पूर्व सांसद की एजेंसी के इन सिक्योरिटी गार्ड को प्रतिमाह 1 करोड़, इस तरह सालभर में 12 करोड़ रुपए वेतन दिया जाता था ताकि वे चंपत राय को प्रोटेक्शन देते रहें। यह रकम कहां से आती थी? जिस रास्ते से चढ़ावे को रफा-दफा किया जाता था, वहां कोई झांक भी न पाए इसकी निगरानी ये गार्ड करते थे।'

हमने कहा, 'संत तुलसीदास ने रामायण में लिखा-समरथ को नहीं दोष गुसांई' अर्थात जिसके पास ताकत, सत्ता या पॉवर है उसे कोई दोषी नहीं कह सकता। चढ़ावे के नोटों की गिनती करनेवाले 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं जो मामूली औकात के लोग थे लेकिन देखते ही देखते करोड़पति हो गए और उन्होंने खूब प्रापर्टी बना ली। ट्रस्ट का एक अर्थ होता है विश्वास लेकिन मंदिर के ट्रस्ट पर विश्वास तार-तार हो चुका है जिसे भंग किया जाना चाहिए, बगैर एफआईआर एसआईटी बिठा दी गई। इसलिए सजा कैसे होगी?'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, कहते हैं महाकुंभ के दौरान हर दिन 10-15 लाख रुपए का चढ़ावा पार कर दिया गया। अनेक वर्षों से चल रही चढ़ावा चोरी के बाद भी सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों की इस पर निगाह नहीं गई या उन्हें वहां जांच करने का निर्देश नहीं दिया गया।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, ऐसा लगता है कि इस प्रकरण में छोटे-मोटे प्यादों को बलि का बकरा बनाया जाएगा और लूट के सुत्रधार बच निकलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर का शिलान्यास, उद्घाटन, प्राणप्रतिष्ठा और रामलला की पहली पूजा की लेकिन वह इस चढ़ावा लूट पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं।' हमने कहा, 'महात्मा गांधी ने सिखाया था- बुरा मत बोलो, बुरा मत देखो और बुरा मत सुनो। मोदी-शाह इसलिए मौन हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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