उपराष्ट्रपति बनने की चाहत, धनखड़ के जाने से ममता को राहत
- Written By: चंद्रमोहन द्विवेदी
पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ अब एनडीए की ओर से राज्यसभा सभापति पद के उम्मीदवार होंगे. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?’’ हमने कहा, ‘‘सबसे बड़ी बात तो यह है कि धनखड़ यदि उपराष्ट्रपति बन जाते हैं तो बंगाल की सीएम ममता बनर्जी राहत की सांस लेंगी. उनका धनखड़ से छत्तीस का आंकड़ा रहा है.
दोनों के बीच लगातार कितने ही मुद्दों पर टकराव बना रहता था. दोनों ही एक दूसरे का हाइपरटेंशन बढ़ाते रहते थे. जब जगदीप धनखड़ को चांसलर के रुप में जाधवपुर यूनिवर्सिटी जाना था तो ममता ने उन्हें हेलीकाप्टर उपलब्ध नहीं कराया था. इसलिए धनखड़ ने गड्ढे भरी सड़कों से हिचकोले खाते हुए कार में कोलकाता से जाधवपुर तक का 8 घंटों का सफर तय किया था. धनखड़ भी केंद्र के इशारे पर ममता को झटके देते रहते थे. हाल ही में ममता ने खुद को बंगाल के सारे विश्वविद्यालयों का चांसलर बना लिया. यह राज्यपाल के अधिकार में हस्तक्षेप था.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ममता बनर्जी को धनखड़ रूपी धन सहेजना नहीं आया. अब धनखड़ दिल्ली की राह पकड़ेंगे. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा सभापति धनखड़ दोनों ही राजस्थानी होंगे.’’
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हमने कहा, ‘‘जहां तक धन का सवाल है उसके बारे में कहा गया है- गोधन, गजधन, बाजीधन और रतनधन खान, जब आए संतोषधन सब धन धूरी समान. इसका अर्थ है कि गाय, हाथी घोड़े और रत्नों की खदान से भी व्यक्ति का मन नहीं भरता. जब संतोषरूपी धन मिल जाता है तो उसके सामने सारा धन धूल के समान हो जाता है. जरूरत से ज्यादा धन होने पर व्यक्ति व्यसनों में पड़ जाता है. धन चोरी होने का खतरा बना रहता है. धन अधिक है तो उसका उपयोग दान करने में करना चाहिए.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, अभी तो धनखड़ का उपयोग उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए किया जा रहा है.’’
