Navbharat Nishanebaaz: मजबूत सुरक्षा करने का वादा, घर को किला बनाने का इरादा

Diwali Fortification Satire: दिवाली पर घर की मरम्मत से शुरू हुई बातचीत सियासी किलेबंदी तक पहुंच गई। निशानेबाज के व्यंग्य में सत्ता, विपक्ष, जनता की ताकत और आपसी समन्वय का संदेश है।
Political Power and Public Protest
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Highlights

  • दिवाली से पहले घर की मरम्मत और किलेबंदी के बहाने राजनीतिक व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया है।

  • लेख में शिवाजी महाराज के किलों, ऐतिहासिक दुर्गों और सुरक्षा के लिए किले बनाने की परंपरा का जिक्र है।

  • चुनावों में सत्ता के मजबूत किलों के ढहने और जनता की ताकत का संदेश दिया गया है।

  • लेख का निष्कर्ष है कि किलेबंदी के बजाय विपक्ष से समन्वय, उदार नीति और आपसी एकता जरूरी है।

Political Power and Public Protest: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमने तय किया है कि अपने घर को सुधारकर रहेंगे। दिवाली आने से पहले सारा कबाड़ निकालकर खिड़की-दरवाजों को रंगरोगन से चमका लेते हैं। दीवारों पर नया प्लास्टिक इमल्शन पेंट चढ़ा देते हैं।'

हमने कहा, 'आपका घर अच्छा-भला है। उसे वैसा ही रहने दें। अभी आप खिड़की-दरवाजे की बात कर रहे हैं, कल चलकर छज्जे, अटारी, रोशनदान में हेरफेर करने की सोचेंगे।' पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, बुजुर्गों ने समझाया है कि मजबूत किले के कंगूरे और बुर्ज की भी समय-समय पर मरम्मत करानी पड़ती है। चारदीवारी भी ऊंची करवानी जरूरी है।'

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हमने कहा, 'यह किले और बुर्ज की बात कहां से आ गई? कुछ वर्ष पहले आपने मिट्टी की ईंट को रामशिला कहा था, अब अपने मकान को किला कहने लगे। क्या उसे लालकिला बनाकर वहां से भाषण देने की सोच रहे हैं?'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, समय के साथ चलना जरूरी होता है। केंद्र सरकार ने भी तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कितनी जबरदस्त किलेबंदी की थी। राजस्थान के किले देखने विदेशी पर्यटक आया करते हैं। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के किले सभी के लिए गौरवपूर्ण हैं। दिवाली में बच्चे उत्साहपूर्वक मिट्टी का किला बनाते हैं। सुरक्षा के लिए किला बनवाना जरूरी माना जाता है। विदेश में भी शानदार किले हैं जो फोर्ट या कैसल कहलाते हैं।'

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हमने कहा, 'विमानों और ड्रोन के युग में किलों से सुरक्षा नहीं होती। अब किले इतिहास व पुरानी संस्कृति का अंग बनकर रह गए हैं। इसलिए किले जैसा मकान बनाने का इरादा छोड़ दीजिए। घर की सुरक्षा के लिए परिवार में एकता जरूरी है। आपने कहावत सुनी होगी 'घर का भेदी लंका ढाए!' जब चुनाव आता है तो सत्ताधीशों के मजबूत किले भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। इमरजेंसी के दौरान नारा लगा था-'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!' इसलिए सत्ताधीशों को हमेशा जनसैलाब से डरना चाहिए, मनमानी और तानाशाही ज्यादा नहीं चलती। ऐसे किलों में दरार पड़ती देखी गई है। किलाबंदी करने की बजाय विपक्ष से समन्वय कर उदार नीति अपनाने में ही भलाई है। नफरत की बुनियाद पर खड़े किए गए किले कभी टिक नहीं पाते।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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