नवभारत निशानेबाज: ट्रंप-जिनपिंग मिल चाटेंगे मलाई, क्योंकि चोर-चोर मौसेरे भाई
Navabharat Nishanebaaz: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन की यात्रा पर हैं। क्या पूंजीवाद और कम्युनिज्म के बीच मतलब की यारी दुनिया की अर्थव्यवस्था का रुख बदल देगी? जानिए इस मुलाकात के पीछे का सच।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
Donald Trump China Visit Economy Impact: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप चीन की यात्रा पर से हैं। पूंजीवादी ट्रंप कम्युनिस्ट शी जिनपिंग कैसे पटरी बिठाएंगे? दोनों की विचारधारा में छत्तीस का आंकड़ा है इसलिए सहमति कैसे और किन बातों पर होगी?’
हमने कहा, ‘दोनों पक्षों की तैयारी मतलब की यारी निभाने की होगी। आपने कहावत सुनी होगी ‘चोर-चोर मौसेरे भाई!’ ट्रंप चाहते हैं कि चीन अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाएं। वह अमेरिका से बोइंग विमान, सोयाबीन, सोरगम, बीफ और इथेनॉल खरीदे। बदले में चीन बड़े पैमाने पर अमेरिका में निवेश करे।’
पड़ोसी ने कहा, ‘विश्व की नंबर वन इकोनॉमी अब नंबर टू इकोनॉमी से तालमेल जमा कर दुनिया के बाकी देशों को अंगूठा दिखाने की सोच रही है। दोनों पक्षों की मुलाकात में ईरान युद्ध, तायवान, मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा टाली जाएगी। सिर्फ धंधे की बात होगी ताकि दोनों मिलकर दुनिया को लूट सकें। चीन भी पूरी तरह कम्युनिस्ट नहीं है। उसने कंट्रोल्ड कैपिटलिज्म या नियंत्रित पूंजीवाद को अपना रखा है। चीन में भी अरबपति बड़ी तादाद में मौजूद हैं। चीन के प्रमुख शहर या मेगासिटी बीजिंग, शंघाई, चेंगडू, गुआनझाऊ, चोंगकिंग उद्योग, वित्त, प्रौद्योगिकी के केंद्र हैं और प्रत्येक की आबादी 1 करोड़ से अधिक है। इसलिए अमेरिका वहां अपने माल के लिए बाजार चाहता है।’
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हमने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप नेता कम, व्यापारी ज्यादा हैं। 2017 में भी वह चीन गए थे। इस समय वह तकनीक और उद्योग क्षेत्र के दिग्गजों को अपने साथ चीन ले गए हैं। चीन भी चाहेगा कि टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप ढील दें। चीन के साथ पिंगपांग (टेबल टेनिस) डिप्लोमेसी की शुरुआत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने की थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वह चीन की यात्रा करने वाले पहले प्रेसिडेंट थे।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, ट्रंप ने कहा है कि ईरान को झुकाने के लिए चीन की मदद उन्हें नहीं चाहिए। अमेरिका खुद ही युद्ध या शांतिपूर्ण चर्चा से ईरान की समस्या सुलझा लेगा। ट्रंप की यात्रा आपसी व्यवसाय को लेकर है। चीन-अमेरिका तालमेल ज्यादा बढ़ा तो पुतिन प्रेशर में आ जाएंगे और जापान तथा तायवान की बेचैनी बढ़ जाएगी।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
