ममता बनर्जी (डिजाइन फोटो)
Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज टीएमसी सुप्रीमो व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बुरी तरह पछाड़ने के बाद, वह कोलकाता से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जाएंगी और फिर वहां कब्जा करूंगी। उनकी इस घोषणा पर आपकी क्या राय है?’
हमने कहा, ‘राय लेनी है तो किसी रायसाहब या रायबहादुर के पास जाइए। हम तो इतना कहेंगे कि कोलकाता से दिल्ली का सफर काफी पुराना है। अंग्रेजों ने पहले कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया था। बाद में वह दिल्ली शिफ्ट हुए, जहां पंचम जॉर्ज का दरबार भरा था और ल्यूटन जैसे वास्तुकार ने नई दिल्ली बनाई थी। इसी तरह नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भी अपनी आजाद हिंद फौज और देशप्रेमियों को ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था। मोदी भी तो गुजरात से दिल्ली आकर देश के प्रधानमंत्री बने। ममता के लिए दिल्ली नई नहीं है। मनमोहन सिंह की सरकार में वह रेलमंत्री थीं’।
पड़ोसी ने कहा निशानेबाज, ‘हमें वह वक्त याद आता है, जब केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद ममता कोलकाता में ही रहती थीं और रेल मंत्रालय की फाइलें उनके हस्ताक्षर के लिए दिल्ली से कोलकाता विमान से भेजी जाती थीं। दिल्ली जाने पर भी उनका मन अपने राज्य में अटका हुआ था।’
हमने कहा ‘अब ममता की राष्ट्रीय स्तर की महत्वाकांक्षा जोर मार रही है। उनकी घोषणा का आशय है कि बंगाल का चुनाव तो वह चुटकी बजाते जीत लेंगी। फिर दिल्ली जाकर मोदी सरकार को चुनौती देंगी। जरा सोचकर देखिए कि तब दिल्ली में मुर्मू, मोदी और ममता सभी एक साथ मौजूद रहेंगे। मोदी के समान ममता ने भी अपने मन की बात कह दी है।
यह भी पढ़ें:- नवभारत निशानेबाज: ट्रंप को सीधे शांति वार्ता में आसानी, तैयार हैं बोमन व स्मृति ईरानी
पड़ोसी ने कहा, ‘दिल्ली में उन्हें बीजेपी के अलावा आम आदमी पार्टी से भी मुकाबला करना होगा। वहां केजरीवाल के कार्यकर्ता भी तो हैं। बंगाल ममता बनर्जी का होम ग्राउंड है। वहां का ईडन गार्डन छोड़कर दिल्ली जाने में क्या रखा है? यदि ऐसे ही राज्य के नेता दिल्ली जाने लगे, तो उनकी होम स्टेट का क्या होगा? नीतीश के बाद ममता की भी यही तैयारी है। हमने कहा, ‘ममता की महत्वाकांक्षा उन्हें दिल्ली की ओर आकर्षित कर रही है। ऊंचा सोचने में कौन सा नुकसान है। ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि आसमान से गिरे, खजूर में लटके।’