उपद्रवियों को पकड़ा जाए, कौन कराना चाहता है देश में ट्रेन दुर्घटनाएं?
आखिर कौन हैं वो देश के दुश्मन जो ट्रेन दुर्घटना कराने की लगातार साजिश कर रहे हैं और रेल यात्रियों की जान लेने पर आमादा हैं। इस तरह की खतरनाक हरकतों से रेल विभाग भी परेशान है क्योंकि यह सारी शरारत जानबूझकर की जा रही है? कहीं इसके पीछे किसी विदेशी ताकत या आतंकियों का हाथ तो नहीं है?
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
आखिर कौन हैं वो देश के दुश्मन जो ट्रेन दुर्घटना कराने की लगातार साजिश कर रहे हैं और रेल यात्रियों की जान लेने पर आमादा हैं। इस तरह की खतरनाक हरकतों से रेल विभाग भी परेशान है क्योंकि यह सारी शरारत जानबूझकर की जा रही है? कहीं इसके पीछे किसी विदेशी ताकत या आतंकियों का हाथ तो नहीं है?
ताजा घटना में राजस्थान के अजमेर जिले में वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर पर एक किलोमीटर के अंतराल में 2 सीमेंट के ब्लॉक डालकर एक मालगाड़ी को पटरी से उतारने की साजिश की गई। मालगाड़ी का इंजन ब्लाक तोड़ते हुए निकल गया। राजस्थान में 1 महीने में तीसरी बार ट्रेन को बेपटरी करने का प्रयास किया गया।
28 अगस्त को राजस्थान के छबड़ा में मालगाड़ी के ट्रैक पर मोटर साइकिल का स्क्रैप डाला गया था जिससे मालगाड़ी का इंजन टकरा गया था। इसके पूर्व अहमदाबाद-जोधपुर वंदे भारत ट्रैक पर परली में ट्रेन पटरी पर रखे सीमेंट ब्लॉक से टकरा गई थी। इसी तरह महाराष्ट्र में सोलापुर के कुर्दुवाड़ी स्टेशन के पास रेलवे पटरी पर सीमेंट के ब्लाक पाए गए।
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लोको पायलट ने समय रहते ट्रेन को रोक लिया था। रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार जून 2023 से लेकर अब तक ऐसी 2 दर्जन से ज्यादा घटनाएं हुई हैं जिनमें रेल पटरियों पर गैस सिलेंडर, लोहे के रॉड, सीमेंट ब्लाक या साइकिल पड़ी मिली। खास बात यह है कि इनमें से 15 घटनाएं गत अगस्त माह की हैं तथा 3 घटनाएं सितंबर में हुईं।
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पिछले माह अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस की 20 बोगियां कानपुर के गोविंदपुरी स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थीं। जांच में यह बात सामने आई कि ट्रेन का इंजन ट्रैक पर रखी किसी वस्तु से टकरा गया था। गत सप्ताह कानपुर में रेलवे ट्रैक पर गैस सिलेंडर रखकर दुर्घटना की साजिश रची गई।
कालिंदी एक्सप्रेस के ट्रेन चालक ने उसे समय रहते देख लिया और आपातकालीन ब्रेक लगाए जिससे ट्रेन की गति काफी धीमी हो गई फिर भी सिलेंडर उससे टकरा कर दूर जा गिरा। यदि ट्रेन की रफ्तार तेज होती तो सिलेंडर में विस्फोट भी हो सकता था। इसी तरह ट्रेनों पर शरारती तत्वों द्वारा पत्थरबाजी की घटनाएं भी हो रही हैं।
4 सितंबर को लखनऊ से पटना जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर वाराणसी स्टेशन से रवाना होने के कुछ देर बाद पत्थर फेंके गए जिससे ट्रेन की खिड़कियां क्षतिग्रस्त हुईं। इसके दूसरे दिन 5 सितंबर को रांची से पटना जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर हजारीबाग में पथराव किया गया। पता नहीं इस शानदार ट्रेन को क्यों निशाना बनाया जाता है? रेल सुरक्षा बल मुस्तैदी से ऐसी घटनाओं की जांच करे और उन शरारती तत्वों को पकड़े जो ट्रेन दुर्घटना कराने की खतरनाक साजिश में लिप्त हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
