

Incomplete Highway Projects India: देश के विभिन्न राज्यों में अनेक महामार्गों का निर्माण अभी तक अधूरा है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में सर्वाधिक 51 राष्ट्रीय महामार्ग परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं जिनको गत 5 वित्त वर्षों में मंजूरी मिली है व निर्माण शुरू हुआ है।
उत्तर प्रदेश में 39 प्रकल्प अधूरे पड़े हैं। आंध्र प्रदेश में 38, कर्नाटक में 37 तथा मध्य प्रदेश व केरल में प्रत्येक 33 सड़क परियोजनाएं अभी पूरी नहीं हो पाई हैं। जिन 5. राज्यों में महामार्ग पूरे नहीं बन पाए हैं उनमें से 3 राज्य बीजेपी शासित हैं। महामार्ग निर्माण में आने वाली दिक्कतों में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी अनुमति, अतिक्रमण जैसे कारण शामिल हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं भी आती हैं, जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टान गिरना, जमीन खिसकना आदि, वृक्ष काटने पर नए वृक्षारोपण की गारंटी देने पर भी इसमें ढील बरती जाती है, नितिन गडकरी ने महामार्ग निर्माण में एक और दिक्कत का उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से जलरोधक अच्छी किस्म का बिटुमिन (डामर) नहीं आ पा रहा है।
इसलिए देश में बायो-बिटुमिन बनाने प्रयोग किया जा रहा है, जिसकी उपयोगिता का परीक्षण अभी बाकी है। नागपुर-जबलपुर मार्ग पर 1 किलोमीटर सड़क बनाने में उसका इस्तेमाल किया गया, जिसकी जांच होना शेष है।
इसके अलावा महामार्ग निर्माण में ठेकेदारों की सुस्ती भी एक बड़ी वजह है, जो समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं करते। ऐसे ठेकेदारों पर 3 वर्षों में 2,732 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 780 करोड़ रूपये वसूल किए गए हैं।
ठेकेदार उसके विरोध में आंदोलन भी करते हैं। इसके अलावा निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। मुंबई-गोवा तथा मुंबई-पुणे बेंगलुरु महामार्ग की खराब हालत, अधूरे निर्माण, गड्ढे, पर्यायी मार्ग आदि को लेकर सवाल उठते रहते हैं।
नागपुर-काटोल मार्ग को फोरलेन बनाने की समय सीमा 2 वर्ष पूर्व ही समाप्त हो गई, अब तक यह नहीं बन पाया है। देश में महामार्ग निर्माण की गति, 2023-24 में प्रतिदिन 34 किलोमीटर रही। 2024-25 में प्रतिदिन 29 किलोमीटर तथा 2025-26 में प्रतिदिन 25 किलोमीटर रही।
गति क्यों धीमी हो रही है, इस पर विचार होना चाहिए, प्रगतिशील महाराष्ट्र में भी सड़क निर्माण में सुस्ती दिखाई दे रही है। विकास के लिए सड़कों का तेजी से निर्माण आवश्यक है, लेकिन इसमें होने वाले विलंब की वजह से लागत बढ़ती चली जा रही है, ज्यादा ईंधन लगने से वाहन चालकों को नुकसान उठाना पड़ता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा