निशानेबाज: कबूतरखाना ले जाया गया दूर, दाना डालने वाले हुए मजबूर
Pigeon House Shifted: मुंबई के जैन समाज को कबूतरों से विशेष प्रेम है, इसलिए वह कबूतरखाना बंद करने के खिलाफ है। उनका आंदोलनकारी रवैया देखकर सरकार ने कबूतरखाना बंद करने की बजाय अन्यत्र शिफ्ट कर दिया है।
- Written By: दीपिका पाल
कबूतरखाना ले जाया गया दूर दाना डालने वाले हुए मजबूर (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, मुंबई के जैन समाज को कबूतरों से विशेष प्रेम है, इसलिए वह कबूतरखाना बंद करने के खिलाफ है। उनका आंदोलनकारी रवैया देखकर सरकार ने कबूतरखाना बंद करने की बजाय अन्यत्र शिफ्ट कर दिया है। अब कबूतर प्रेमियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि कबूतरखाने को 10-12 किलोमीटर दूर क्यों ले जाया जा रहा है। उतनी दूर दाना डालने कोई कैसे जाएगा? ज्यादा से ज्यादा 2 किलोमीटर पर कबूतरखाना रहना चाहिए।’
हमने कहा, ‘एक ओर इस समुदाय की जीवदया है तो दूसरी तरफ मुंबई महापालिका का आदेश है जिसमें कबूतरों को दाना डालने वालों को ऐसा करने से मना किया गया। कबूतर की विष्ठा के संपर्क में आने से फेफड़े में इन्फेक्शन होता है तथा ब्रांकाइटिस, दमा यहां तक कि क्षयरोग भी हो सकता है। इसलिए कबूतर पालने और दाना डालकर झुंड जमा करने पर मनाही की गई है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, कबूतर की कद्र देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू करते थे। चाहे 15 अगस्त का स्वाधीनता दिवस समारोह हो या गुटनिरपेक्ष देशों का सम्मेलन, वह अपने दोनों हाथों से खुले आसमान में उड़ने के लिए कबूतर छोड़ा करते थे। लंदन के पिकैडली सर्कस व रोम के स्क्वेयर पर भी कबूतरों का झुंड मौजूद रहता है। प्राचीन काल में प्रशिक्षित कबूतरों के जरिए डाक सेवा शुरू की गई थी। कबूतर के पैर में चिट्ठी बांध दी जाती थी। वह चिट्ठी पहुंचाता और फिर उसी तरह से जवाब लेकर वापस आ जाता था। आपने सलमान खान और भाग्यश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का गीत सुना होगा कबतर जा-जा, पहले प्यार की पहली चिट्ठी साजन को दे आ! कवयित्री माया गोविंद ने भी गीत लिखा था- चढ़ गया ऊपर रे, अटरिया पे लोटन-कबूतर रे! कबूतर पालना नवाबों का शौक रहा है।’
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हमने कहा, ‘मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राय है कि कबूतरों की जान बचाना, पर्यावरण की रक्षा करना और नागरिकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना तीनों ही बातें महत्वपूर्ण हैं। बीएमसी कबूतरों को दाने की सप्लाई जारी रखे हुए है लेकिन कबूतरखानों को अब आबादी से दूर शिफ्ट किया जाएगा। कबूतरों को खुद हवाई सर्वे करते हुए वहां पहुंचना होगा। चिड़ियों को दाना डालने में दिक्कत को देखते हुए ही माधुरी दीक्षित ने विकल्प सुझाया था दीदी तेरा दिवाना, हाय राम कुड़ियों को डाले दाना !’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
