नवभारत संपादकीय: कर्जमाफी और बिजली बिल माफी के बाद भी क्यों नहीं थम रहा किसानों का संकट?

Maharashtra Farmers Distress: बिजली बिल माफी और कर्जमाफी की घोषणाओं के बावजूद महाराष्ट्र में किसान फसल नुकसान, महंगे बीज-खाद, खराब बीज और बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
Navbharat Editorial: Why does the farmers' crisis persist despite loan waivers and electricity bill waivers?
महाराष्ट्र किसान, किसान आत्महत्या, (सोर्स: नवभारत डिजाईन फोटो )
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Maharashtra Farm Suicide Crisis: राज्य के किसानों को दोबारा दिलासा देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 48,000 करोड़ रुपए का बकाया बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है और इसके पहले राज्य के 56 लाख किसानों को 36,585 करोड़ रुपए की कर्जमुक्ति देनेवाली पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर योजना घोषित की है। इसके बावजूद किसानों की हताशा दूर नहीं हो पाई है।

इसके अनेक कारण हैं। फसल नहीं होना, कर्ज का बढ़ता बोझ, कृषि उपज के गिरे हुए दाम की वजह से पिछले 6 महीनों में अमरावती संभाग के 415 किसानों ने आत्महत्या की। यवतमाल जिले में सर्वाधिक 128 किसानों ने मौत को गले लगाया। हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जुलाई माह आधा बीत जाने पर भी वर्षा नहीं हो रही है।

महंगे बीज-खाद और फर्जीवाड़े से किसान बेहाल

खाद और बीज महंगे हो गए हैं। इतना ही नहीं, अमरावती और अकोला जिलों में किसानों ने जो बीज बोये, वह ऊगे ही नहीं। कंपनियों ने निकृष्ट बीज किसानों को बेचे। उनकी बुआई का खर्च, परिश्रम व समय व्यर्थ गया। न्याय का तकाजा है कि प्रभावित किसानों को मुफ्त में दर्जेदार बीज दिए जाएं और बीज कंपनियां नुकसान भरपाई करें।

किसानों पर आसमानी-सुलतानी संकट टूट पड़ा है। गत वर्ष अकोला जिले में सोयाबीन खरीदी घोटाला हुआ था। एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी ने 19,723 क्विंटल सोयाबीन खरीदी जबकि नाफेड के गोदाम में केवल 18,426 क्विंटल सोयाबीन पहुंची।

लाखों रुपए कीमत की 1297 क्विंटल सोयाबीन खरीदी की नकली रसीदें बनाई गई। पुलिस ने मामला दर्ज किया व कंपनी को काली सूची में डाला गया लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई की गति बहुत धीमी रहती है।

बोगस बीज बेचकर किसानों को ठगनेवालों पर सख्ती होनी चाहिए, यवतमाल जिले के 75 प्रतिशत किसानों पर कर्ज बकाया है। ऐसा होने पर बैंक उन्हें नया कर्ज देते नहीं इसलिए वे साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेकर खेती करने को मजबूर होते हैं, यवतमाल जिले में फसल कर्ज 50 प्रतिशत से भी कम वितरित हुआ है।

कर्जमाफी की आस, राहत का इंतजार जारी

कर्जमाफी के पात्र किसानों को आशा थी कि उनका सात-बारा कोरा कर दिया जाएगा, इसके साथ वह नया कर्ज लेकर खरीफ की तैयारी में जुट जाएंगे, सरकार की ओर से आत्महत्या करनेवाले किसान के परिजनों को 1 लाख रुपए की मदद दी जाती है। ऐसे 144 किसानों के सिर्फ 27 परिवारों को अब तक सरकार की ओर से मदद मिली है। जबकि 117 किसान परिवार अब भी मदद की प्रतीक्षा में हैं।

मुख्यमंत्री विदर्भ के किसानों का दर्द समझते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सूखामुक्त विदर्भ के लिए प्रयत्न करेंगे, राज्य में 24 नए बांध बनाए जाएंगे और 16 पुराने बांधों की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। विदर्भका एक भी जिला सूखाग्रस्त नहीं रहने दिया जाएगा।

वैनगंगा, नलगंगा जैसी योजनाओं से जलसंचय किया जाएगा। राज्य के 52 प्रतिशत हिस्से में वर्षा बहुत कम होती है जबकि अनेक क्षेत्रों में बारिश का पानी व्यर्थ ही समुद्र में चला जाता है। इसे देखते हुए 200 टीएमसी पानी पश्चिम महाराष्ट्र से मराठवाडा को देने की योजना है। उत्तर महाराष्ट्र के लिए भी सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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