नवभारत संपादकीय: ऑटोचालकों को मराठी सीखने के लिए मिला 1 साल, फडणवीस ने राजनीति पर लगाया ब्रेक

Mandatory Marathi Rule For Drivers: महाराष्ट्र में ऑटोरिक्शा चालकों के लिए अनिवार्य मराठी भाषा नियम पर अब 1 साल की मोहलत मिल गई है। इस फैसले के पीछे का राजनीतिक और व्यावहारिक पक्ष समझें।
Chief Minister Devendra Fadnavis
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Drivers Get One Year For Learning Marathi: बहुभाषी होना बहुत अच्छी बात है और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जिन अन्य राज्यों के रहने वाले आईएएस व आईपीएस अधिकारियों की महाराष्ट्र में पोस्टिंग होती है, वह कुछ ही महीनों में मराठी बोलना सीख लेते हैं। इच्छा और प्रयास हों तो सब संभव हो जाता है। मुद्दा यह है कि काफी बड़ी तादाद में उत्तर प्रदेश व बिहार के ऑटोरिक्शा चालक मुंबई, पुणे, कोल्हापुर, सोलापुर में ऑटोरिक्शा चलाते हैं।

ऑटोचालकों के लिए नियम और भाषा का मेल

महाराष्ट्र में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऑटोचालकों के लिए मराठी सीखना और यात्रियों से मराठी में संभाषण करना अनिवार्य बना दिया था। हिंदी व मराठी दोनों की लिपी देवनागरी है और दोनों भाषाओं के शब्द भी काफी मिलते-जुलते हैं। इसलिए कामचलाऊ मराठी सीखने में कोई कठिनाई नहीं थी।

यदि उत्तर भारत का कोई ऑटोरिक्शा चालक तमिलनाडु या केरलम में ऑटो चलाए तो क्या तमिल या मलयालम जाने बिना काम कर पाएगा? वैसे भी ऑटोचालकों को यात्री से बोलचाल की मराठी में गिनीचुनी बात ही करनी है, कोई साहित्यिक चर्चा तो करनी नहीं है फिर विवाद क्यों होना चाहिए? महाराष्ट्र में नागपुर, गोंदिया, अमरावती जैसे शहरों में तो मराठीभाषी भी घर से बाहर निकलते ही हिंदी बोलने लगते हैं। मुंबई भी बहुभाषी या कॉस्मोपोलिटन है, इसलिए वहां भी कोई दिक्कत नहीं है।

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जबरदस्ती के बजाय सहजता जरूरी

विदर्भ के 11 जिलों में कभी भी भाषाविवाद नहीं रहा। कोई भाषा प्रेम और अनुरोधपूर्वक सिखाई जाए तो ठीक है। यह भावना नहीं होनी चाहिए कि उसे जबरन लादा जा रहा है। ऑटोचालक यदि यातायात के नियमों का पालन करते हुए यात्री को सुरक्षित उसके गंतव्य स्थान तक पहुंचाता है और सही किराया लेता है तो उस पर शीघ्र मराठी सीखने का दबाव क्यों होना चाहिए? कहां जाना है, कितना किराया होगा, रास्ते में कहीं रुकना है क्या, वापसी के लिए ठहरना है क्या जैसे वाक्यों को मराठी में बोलना सीखने में समय ही कितना लगता है? दरअसल इस मुद्दे को लेकर जिस तरह की राजनीति की गई, वह सबके सामने है।

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वोट बैंक और राजनीतिक समीकरण

शिवसेना का शिंदे गुट ठाकरे बंधुओं के मराठी वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रहा था और हिंदी भाषी ऑटोरिक्शा चालकों को मराठी सीखने का प्रमाणपत्र बांटकर शिंदे गुट के हिंदी भाषियों पर डोरे डाल रहा था। इससे बीजेपी को राज्य में अपना हिंदी भाषी वोट बैंक टूटने के आसार नजर आने लगे।

चुनावी असर और 1 साल की मोहलत

उत्तर प्रदेश में कुछ महीने बाद होनेवाले विधानसभा चुनाव पर भी मराठी सीखने की जबरदस्ती का विपरीत परिणाम हो सकता था क्योंकि कतने ही ऑटोचालक मूलतः यूपी व हिंदी प्रदेशों के रहनेवाले हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीधा हस्तक्षेप कर परिवहन मंत्री सरनाईक का फैसला बदल डाला और ऑटोरिक्शा चालकों को मराठी सीखने के लिए पूरे 1 वर्ष की लंबी मोहलत दे दी।

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