

Ramdas Athawale On Anti Conversion Law: केंद्रीय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने देश के कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है। उन्होंने महाराष्ट्र में आज से लागू हुए धर्मांतरण विरोधी कानून, नेपाल में आई बाढ़, आरक्षण व्यवस्था की संवैधानिक स्थिति, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों और महिला आरक्षण विधेयक जैसे विषयों पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की।
महाराष्ट्र में लागू हुए धर्मांतरण विरोधी कानून पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने इसे सरकार का एक सकारात्मक और जनहितैषी कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को अपनी स्वेच्छा से किसी भी धर्म को अपनाने या आचरण करने की स्वतंत्रता देता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जबरन, डरा-धमकाकर या किसी भी प्रकार का लालच देकर कराया जाने वाला धर्म परिवर्तन कानूनन अपराध है। ऐसे असामाजिक मामलों पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा कड़े नियम और कानून बनाना बेहद आवश्यक है।
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर चिंता जताते हुए मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। कई लोगों की जान चली गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र समेत भारत के विभिन्न हिस्सों से नेपाल गए कुछ पर्यटक भी वहां फंसे हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास कर रही है।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि राहुल गांधी को युवाओं से बातचीत करने का पूरा अधिकार है, लेकिन झूठे दावे फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्षी पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस देश में लंबे समय तक सत्ता में रही। उस समय महिलाओं और युवाओं को न्याय क्यों नहीं मिला।
देश में शुरू आरक्षण हटाओ आंदोलन पर भी केंद्रीय मंत्री ने अपनी राय रखी। रामदास आठवले ने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। बाद में वी.पी. सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया।
रामदास आठवले ने कहा कि मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसलिए आरक्षण का विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी का स्पष्ट रुख है कि दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के आरक्षण को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण को भी बनाए रखने की बात कही।
महिला आरक्षण और संसद के विशेष सत्र के मुद्दे पर रामदास आठवले ने कहा कि विपक्ष विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहा है और सरकार भी इस पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर भी निर्णय लिया जाना बाकी है।