नवभारत संपादकीय: 10 दिन बाद खत्म हुआ सस्पेंस, अंततः सतीशन ही केरल के मुख्यमंत्री

Kerala CM Selection: केरल में यूडीएफ की जीत के बाद मुख्यमंत्री चयन में 10 दिन की माथापच्ची के बाद वीडी सतीशन के नाम पर सहमति बनी। स्थानीय नेतृत्व और सहयोगियों की भूमिका चर्चा में रही।
Navabharat Editorial: Suspense Ends After 10 Days; Ultimately, Satheesan to be Kerala's Chief Minister
वीडी सतीशन,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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UDF Kerala Chief Minister: केरल में यूडीएफ की विधानसभा चुनाव में जीत के बावजूद मुख्यमंत्री का चयन करने में 10 दिन लग गए। आखिर मुस्लिम लीग का दबाव काम आया और वीडी सतीशन को सीएम बनाने के लिए कांग्रेस को राजी होना पड़ा। कुल 140 सीटों में से 102 सीटें जीतनेवाली कांग्रेस केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने की फिराक में थी जो कि राहुल गांधी के अत्यंत निकटवर्ती माने जाते हैं लेकिन इंडियन मुस्लिम लीग के अलावा स्थानीय कार्यकर्ताओं की भी राय थी कि दिल्ली से भेजा हुआ मुख्यमंत्री नहीं चाहिए, स्थानीय नेता को ही कमान सौंपी जाए।

वीडी सतीशन एक मजबूत कांग्रेसी नेता हैं। उन्होंने चुनाव के समय घोषणा की थी कि यदि यूडीएफ को 100 से कम सीट मिली तो वह राजनीति छोड़ देंगे, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहते हुए उनों वहां के जनमानस की पूरी जानकारी है। कांग्रेस की जीत में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।

केरल में काफी समय बारी-बारी से एलडीएफ और यूडीएफ की सरकार आती रही लेकिन 2021 में केरल की जनता ने एलडीएफ को लगातार दोबारा सत्ता सौंपी थी। इस तरह पिनराई विजयन 10 वर्षों तक मुख्यमंत्री बने रहे। विविध कारणों से विजयन के प्रति जनरोष बढ़ा और उनके हाथ से सत्ता चली गई।

कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान के दौरान नारा दिया था- केरलम जयिक्कुम, यूडीएफ नायिक्कुम अर्थात केरल जीतेगा और यूडीएफ नायक बनेगा, केरल की स्थिति अन्य राज्यों से भिन्न है, यहां हर दूसरे घर से कोई न कोई व्यक्ति खाड़ी देशों में कार्यरत है और वहां से पैसा भेजता है। केरल के लोग हमेशा से कहीं भी जाकर काम करने के लिए तैयार रहते हैं।

वहां पर्यटन को और भी बढ़ावा देने की जरूरत है। भारत में केरल ऐसा राज्य है जो साक्षरता में सबसे आगे है फिर भी वहां रोजगार निर्माण की दिशा में विशेष प्रयास नहीं किए गए। वहां से समुद्री खाद्य (सौ फूड) का एक्सपोर्ट और बढ़ाया जा सकता है। राज्य पर भारी कर्ज, औद्योगीकरण में पिछड़ापन जैसी समस्याओं का उचित समाधान खोजना होगा।

चुनाव के समय दिए गए आश्वासनों की पूर्ति के लिए वित्तीय प्रावधान करना सरकार की जिम्मेदारी होगी। 3,000 रुपए प्रतिमाह कल्याणकारी पेंशन, सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त प्रवास, रबर उत्पादक किसानों को न्यूनतम गारंटी भाव देने का प्रचार यूडीएफ ने किया था।

इसके लिए तैयारी रखनी होगी। इसके अलावा यूडीएफ को विपक्षी एलडीएफ तथा बीजेपी का सामना करना पड़ेगा, यद्यपि बीजेपी ने सिर्फ 3 सीटें जीती हैं और 11 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं फिर भी उसके प्रभाव को अनदेखी नहीं की जा सकती।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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