

Ranchi Student Protest Recruitment Exam: दिल्ली के जंतर-मंतर के समान झारखंड में भी भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। विपक्षी पार्टियां जंतर-मंतर का मामला उठाकर केंद्र सरकार को घेर रही हैं, जिसका औचित्य समझा जा सकता है, लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में भी तो प्रदर्शनकारी जेन जी के छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस व पानी की तेज बौछार का उपयोग किया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार के लिए यह आंदोलन बड़ी चुनौती बन गया है। राज्य सरकार ने 3 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, लेकिन छात्रों की चौथी मांग को मानने के प्रति अनिच्छुक हैं। यदि विपक्षी पार्टियां सचमुच युवाओं की चिंताओं को समझ रही हैं, तो उन्हें जंतर-मंतर के समान रांची के छात्र आंदोलन को भी उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए, यदि ऐसा नहीं होता, तो इसे सुविधा की राजनीति माना जाएगा।
परीक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर सुधारना छात्रों व देश के हित में आवश्यक है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के बाद झारखंड के युवाओं को प्रेरणा मिली और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष में वह भी उतर पड़े। 19 दिनों से विद्यार्थी सड़कों पर हैं।
छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए, झारखंड लोकसेवा आयोग की पिछली परीक्षा में भ्रष्टाचार व पेपर लीक प्रकरण को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। फर्क यही है कि दिल्ली की तुलना में झारखंड में सत्तापक्ष अलग है। आंदोलन से निपटने का तरीका वही है। साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतने पर भी छात्र पीछे नहीं हटे और उनके आंदोलन की तीव्रता बढ़ रही है। अ. भा. विद्यार्थी परिषद ने झारखंड बंद करवाया, जिसे मिला-जुला प्रतिसाद मिला।
अब राज्य सरकार ने छात्रों की मांग पर ध्यान दिया है। झारखंड लोकसेवा आयोग की 14वीं प्राथमिक परीक्षा रद्द करने तथा धांधली की सीआईडी जांच या अवकाश प्राप्त जज द्वारा जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। विद्यार्थियों की मांग है कि जांच सीबीआई द्वारा होनी चाहिए, उन्हें राज्य सरकार पर विश्वास नहीं है।
झारखंड में सरकारी नौकरी से संबंधित परिक्षाओं के आयोजन व नतीजे में धांधली के आरोप लगातार लगते रहे हैं, लेकिन सरकार ने उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। जेपीएससी परीक्षा घोटाले में गुप्तचर विभाग की पूछताछ में टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्रा.लि. के मार्केटिंग मैनेजर ने बताया कि पूर्व परीक्षा के लिए 5 लाख तथा अंतिम परीक्षा के लिए 70 लाख रुपये लिए जाते थे और परीक्षार्थियों के नंबर बढ़ाए जाते थे।
छात्रों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, धांधली की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। राज्य सरकार की दलील है कि रिक्त पदों के लिए लोकसेवा आयोग व स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की परीक्षाएं न्यायालय के निर्देशानुसार ली गई हैं तथा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन द्वारा चयन किए गए उम्मीदवार अभी नौकरी कर रहे हैं, इसलिए अब परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती।
जब छात्रों ने कड़ा रूख अपनाया तो राज्य सरकार ने सीआईडी जांच का आश्वासन दिया तथा कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट 90 दिनों में दोषियों को सजा सुनाएगा। इस दौरान आंदोलनकारी छात्र गुटों में बंट गए हैं।
ऑल इंडिया स्टुडेंट फेडरेशन की नेता नेहा बोरा भी वहां पहुंच गई लेकिन छात्रों ने आंदोलन में राजनीति लाने से इनकार किया। तब नेहा ने अलग से आंदोलन शुरू किया। आंदोलनकारियों पर पुलिस लाठीचार्ज की विधानसभा में गूंज हुई।
बीजेपी सदस्यों ने झारखंड मुक्तिमोर्चा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विद्यार्थियों पर हुए अत्याचार को लेकर जवाब मांगा है। छात्रों की मांग औचित्य रखती हैं, जिन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।
चंद्रमोहन द्विवेदी नवभारत