नवभारत विशेष: छात्रों का गुस्सा यूं ही नहीं फूटा, वर्षों की निराशा का है नतीजा

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और जवाबदेही को लेकर देश के युवाओं के बढ़ते असंतोष और टूटते भरोसे की अभिव्यक्ति है।
Navbharat Special: Students' anger didn't erupt without reason; it is the result of years of frustration.
छात्र आंदोलन, जंतर-मंतर, युवा आक्रोश, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Published on: 
Updated on: 

Student Protest Education Reform: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो दृश्य दिखाई दिए, वे विरोध की एक घटनाभर नहीं थे, वे देश के करोड़ों युवाओं की मनःस्थिति का आईना थे। हजारों छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने पहुंचे। बाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। देश का युवा गहरे असंतोष में है।

आखिर यह गुस्सा आया कहां से? यह गुस्सा एक दिन में पैदा नहीं हुआ। यह उन वर्षों की निराशा है, जब लाखों युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए अपनी जवानी दांव पर लगा दी। यह उन परिवारों की चिंता है जिन्होंने अपनी बचत बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर दी।

यह उन युवाओं की पीड़ा है जिन्हें हर परीक्षा के बाद यह डर सताता है कि कहीं फिर कोई विवाद, कोई गड़बड़ी या कोई अनिश्चितता उनके सपनों को अधूरा न छोड़ दे।

युवाओं की आवाज दबाने नहीं, सुनने की जरूरत

देश का युवा केवल नौकरी नहीं मांग रहा। वह निष्पक्ष अवसर मांग रहा है। वह ऐसी व्यवस्था चाहता है, जहां उसकी मेहनत का मूल्य हो, जहां उसका भविष्य किसी लापरवाही या अव्यवस्था का शिकार न बने। लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है।

चिंता तब होती है जब विरोध को सुनने के बजाय उसे कानून-व्यवस्था की समस्या मान लिया जाता है। सरकारों को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र केवल बहुमत का नाम नहीं है। लोकतंत्र संवाद का भी नाम है। जो सरकार अपने युवाओं से संवाद खो देती है, वह धीरे-धीरे भविष्य से भी संवाद खोने लगती है।

पुलिस कानून लागू करती है, लेकिन लोकतंत्र में उसका दायित्व केवल भीड़ नियंत्रित करना नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है। युवाओं के प्रदर्शन को दबाने या कुचलने के लिए पुलिस ने जिस तरह का निर्दय बल प्रयोग किया वह उसकी स्थाई संवेदनहीनता है।

पुलिस ने छात्रों नौजवानों पर जिस तरह का बर्बर बल प्रयोग किया है उसकी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। छात्रों की आवाज को केवल 'ब्रेकिंग न्यूज' बनाकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। मीडिया का दायित्व सत्ता से प्रश्न पूछना भी है और समाज को तथ्यपरक जानकारी देना भी। मध्यम वर्ग अक्सर चुप रहता है।

युवाओं का भरोसा बचाना लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती

अपने बच्चों से कहता है- 'मेहनत करो, सब ठीक हो जाएगा।' लेकिन यदि मेहनत के बाद भी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ने लगे, तो सबसे बड़ा संकट केवल युवाओं का नहीं, उस भरोसे का होता है जिस पर पूरा समाज टिका है। आज जंतर-मंतर पर खड़ा छात्र किसी और का नहीं, हमारे-आपके घर का बच्चा है। उसकी चिंता को राजनीतिक चश्मे से नहीं, मानवीय दृष्टि से देखने की जरूरत है।

केवल सत्तापक्ष ही नहीं सभी राजनीतिक दलों के लिए भी यह घटना एक संदेश है कि युवाओं का इस्तेमाल केवल चुनावी भाषणों और रैलियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि युवा केवल वोट बैंक बनकर रह जाएंगे, तो लोकतंत्र की आत्मा मर जाएगी। भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यदि यही पीढ़ी व्यवस्था से निराश होकर महसूस करने लगे कि उसकी आवाज सुनी नहीं जाती, तो यह केवल राजनीतिक चुनौती नहीं, राष्ट्रीय चुनौती बन जाएगी। सरकार संवाद का रास्ता चुने। पुलिस संवेदनशीलता और संयम बनाए रखे और समाज अपने युवाओं के साथ खड़ा हो।

किसी भी देश का भविष्य संसद की दीवारों से कम और उसके युवाओं की आंखों में ज्यादा लिखा होता है। उन आंखों में यदि उम्मीद बची रही, तो भारत का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। लेकिन यदि वहां केवल आंसू और आक्रोश रह गए, तो इतिहास हम सबसे कठिन प्रश्न पूछेगा।

संवाद का रास्ता चुना जाए

इतिहास गवाह है कि किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी सेना, उसकी अर्थव्यवस्था या उसके ऊंचे-ऊंचे भवन नहीं होते। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसके सपने देखने वाले युवा होते हैं। जब वही युवा सड़कों पर उतर आएं, जब उनकी आंखों में उम्मीद से ज्यादा आक्रोश दिखाई देने लगे और जब उनके हाथों में किताबों की जगह तख्तियां आ जाएं, तब समझ लेना चाहिए कि समस्या केवल किसी एक परीक्षा, किसी एक विश्वविद्यालय या किसी एक मंत्रालय की नहीं रह गई है। वह पूरे समाज की चिंता बन चुकी है।

लेख- लोकमित्र गौतम के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com