बेटे की चिंता है, पर पीछे नहीं हटने देंगे; संसद मार्च में लाठीचार्ज के बाद अभिजीत दीपके के माता-पिता का बयान

Jantar Mantar Protest: NEET परीक्षा धांधली के विरोध में हुए लाठीचार्ज के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता ने कहा कि उन्हें बेटे की चिंता है, लेकिन वे आंदोलन से पीछे हटने को नहीं कहेंगे।
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अभीजीत दिपके; उनके माता-पिता (सोर्स-सोशल मीडिया. डिजाइन फोटो)
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Abhijeet Dipke Family Support Jantar Mantar Protest: NEET परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब एक नए मोड़ पर आ गया है। सोमवार को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता पहली बार मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपने बेटे के साथ मजबूती से खड़े हैं और उसे आंदोलन छोड़ने के लिए नहीं कहेंगे।

'बेटे की सुरक्षा की चिंता पर संकल्प अडिग'

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के रहने वाले अभिजीत के माता-पिता ने दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। अभिजीत के पिता भगवान दीपके, जो महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं, ने कहा कि एक पिता होने के नाते उन्हें अपने बेटे की सुरक्षा की चिंता जरूर है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा, "यह आंदोलन अभिजीत ने खुद शुरू किया है। इस मोड़ पर हम उसे पीछे हटने की सलाह नहीं दे सकते"।

'क्या हमारे बच्चे आतंकवादी हैं?'

अभिजीत की मां अनीता दीपके ने पुलिस कार्रवाई के दृश्यों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर लाठीचार्ज के वीडियो देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए पूछा, "18 से 20 साल के इन छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?"। अनीता के अनुसार ये छात्र पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे लेकिन उनकी सुनने के बजाय उन पर लाठियां बरसाई गईं।

सरकार के 'अहंकार' पर बरसे पिता

भगवान दीपके ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब 'अहंकारी' हो गई है। उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सभी छात्र पढ़े-लिखे और जिम्मेदार हैं जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। पिता ने यहाँ तक आरोप लगाया कि पुलिस की यह कार्रवाई 'सरकार प्रायोजित दंगे' जैसा प्रतीत होती है जिसका मकसद शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलना और हिंसा भड़काना था।

संसद मार्च और छात्रों की मुख्य मांगें

बता दें कि सोमवार सुबह जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से नीट परीक्षा में कथित धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद अब देशभर में छात्रों के अधिकारों और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। जहां एक ओर पुलिस प्रदर्शनकारियों पर हिंसक होने का आरोप लगा रही है, वहीं अभिजीत दीपके का परिवार अब इस लड़ाई में उनके साथ ढाल बनकर खड़ा हो गया है।

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