Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

संपादकीय: खामियां दूर करना जरूरी, स्कूलों की छात्र संख्या में गिरावट चिंताजनक

2018-19 के बाद से पिछले 6 वर्षों में स्कूल भर्ती में छात्रों की तादाद घटती जा रही है। 2022-23 में सिर्फ 24.80 करोड़ छात्रों के नाम स्कूलों में दर्ज थे जबकि इसके पूर्व वर्ष में छात्रों की संख्या 25.17 करोड़ थी।

  • By मृणाल पाठक
Updated On: Jan 07, 2025 | 12:23 PM

कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन फोटो)

Follow Us
Close
Follow Us:

नवभारत डेस्क: प्राथमिक शिक्षा के संबंध में एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई प्लस) की 2023-24 की रिपोर्ट ने देश में शालेय शिक्षा की चिंताजनक स्थिति पेश की है। 2018-19 के बाद से पिछले 6 वर्षों में स्कूल भर्ती में छात्रों की तादाद घटती जा रही है। 2022-23 में सिर्फ 24.80 करोड़ छात्रों के नाम स्कूलों में दर्ज थे जबकि इसके पूर्व वर्ष में छात्रों की संख्या 25.17 करोड़ थी। इस तरह 37 लाख की गिरावट आ गई। सरकारी स्कूलों में 88 लाख छात्र कम हुए।

इसके विपरीत 2023-24 में निजी स्कूलों में छात्रों की तादाद बढ़ी। 2022-23 में 8.4 करोड़ छात्र थे जो 2023-24 में बढ़कर 9 करोड़ हो गए। सरकारी स्कूलों के छात्रों की तादाद में गिरावट की एक वजह यह भी है कि आधार कार्ड के जरिए छात्रों की सही संख्या की पुष्टि की जा रही है। कुछ स्कूलों ने ग्रैंट लेने के लिए अपने यहां अधिक छात्रों की भर्ती दिखाई थी तो कुछ छात्रों के नाम एक से अधिक स्कूलों में दर्ज थे।

बिहार, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में छात्रों की पट संख्या तेजी से घटी है। यह बात भी सामने आई है कि स्कूलों में लड़कियों की संख्या में गिरावट आई है। अल्पसंख्यक और अति पिछड़े वर्ग के बच्चों की भी तादाद कम है। रोजगार के लिए यहां-वहां भटकने वाले श्रमिकों के बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। सामाजिक-आर्थिक विषमताओं की वजह से मिडिल और हाईस्कूल में पढ़ाई छोड़नेवाले छात्रों की तादाद बढ़ी है। यह ड्रॉप आउट दर मिडिल स्कूल में 5.2 प्रतिशत थी जो सेकंडरी स्तर में बढ़कर 10.9 प्रतिशत हो गई।

सम्बंधित ख़बरें

66वां दीक्षांत समारोह: डिग्री से आगे सोचें विद्यार्थी, समाज के लिए करें काम; IISER निदेशक सुनील भागव

‘इंटरनेशनल’ शब्द अवैध घोषित! शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, जानें क्या है पूरा मामला

Year Ender 2025: इस साल के सबसे बड़े फैसले जिन्होंने लाखों छात्रों का भविष्य बदला, जानिए पूरी कहानी

OpenAI का एक और बड़ा कदम, ChatGPT ने टीचरों के लिए लाया धमाकेदार फीचर

90 प्रतिशत स्कूलों में बिजली, डेस्कटॉप और लड़के-लड़कियों के लिए अलग टायलेट हैं। इतने पर भी इंटरनेट की समस्या है। 57 प्रतिशत शालाओं में कामचलाऊ कंप्यूटर हैं। जहां इसकी सुविधा नहीं है वहां छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। इन खामियों के बावजूद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों का पता लगाने के बाद उन्हें फिर से स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

नवभारत विशेष से संबंधित ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

समग्र शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में 2030 तक वैश्विक शिक्षा का लक्ष्य है। इसके लिए हर छात्र को स्कूल लाना होगा। शैक्षणिक ढांचे का विस्तार, शिक्षकों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

It is necessary to remove flaws decline in number of students in schools is worrying

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jan 07, 2025 | 12:23 PM

Topics:  

  • Indian Education

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.