जरूरी है मजबूत पकड़ या ग्रिप कभी न कभी बनाएंगे हम चिप
- Written By: चंद्रमोहन द्विवेदी
पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, चिप बनाने की हमारी उम्मीदों पर पानी फिर गया. आप जानते ही है कि आज के जमाने में चिप का कितना महत्व बढ़ गया है और उसकी कितनी व्यापक मांग है.’’
हमने कहा, ‘‘इसमें फिक्र करने की क्या बात है. आपको कहीं न कहीं हॉट चिप्स नामक दूकान मिल जाएगी. वहां से ढेर सारी आलू चिप, करेला चिप और कच्चे केले से बनी बनाना चिप ले आइए. किसी भी किराना दूकान या डेली नीड शाप में आपको चिप के पॅकेट लटके मिलेंगे. वहां से नमकीन या साल्टेड चिप का 20 रुपए वाला पॅकेट खरीद लीजिए. टमाटर महंगे हैं तो क्या टमाटर के स्वाद वाली चिप तो उपलब्ध है. साबुदाने से भी हल्के फुल्के नामक चिप बन जाती है. घर में चिप बनाना हो तो बड़े आलू को तराश कर चिप बनाइए और तेल में तल लीजिए.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आप समझ नहीं रहे हैं. हम उस चिप की बात कर रहे हैं जो स्मार्टफोन से लेकर सुपर कंप्यूटर व ई-कार तक के लिए जरूरी है. तायवान और दक्षिण कोरिया जैसे छोटे देश 10 नैनोमीटर से भी छोटी चिप बनाते है जो बहुत ऊंचे दर्जे की होती हैं. हमें भी सेमिकंडक्टर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है.’’
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हमने कहा, ‘‘इसमें कौन सी दिक्कत है. आपको हर बस में ड्राइवर के साथ कंडक्टर मिलेगा. वह यानीका टिकट काटता है. उसे ट्रेनिंग दी जाती है कि बस में पैर फैलाकर स्टैंड ऐट ईज की पोजीशन में खड़ा रहे. अटेंशन की मुद्रा में खड़ा हुआ तो तीर जाएगा. ट्रक का कंडक्टर सीटी बजाकर गाड़ी को रिवर्स लेने में ड्राइवर की मदद करता है. फिजिक्स में सिखाया जाता है बिजली के लिए गुड और बॅड कंडक्टर क्या है.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज बार-बार गलत निशाना मत लगाइए. अपने देश में फॉक्सकान और वेदांत का वेंचर इसलिए टूट गया क्योंकि वे कोई टेक्नोलाजी प्रोवाइडर को अपने साथ नहीं ला पाए. ऐसे में सेमिकंडक्टर चिप कैसे बनती. इसके लिए शेर अर्ज किया है- बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो कतरा-ए-खूँ भी न निकला.’’
हमने कहा, ‘‘आगे के लिए उम्मीद रखिए. अमेरिकी कंपनी माइक्रान ने हाल ही में कहा है कि वह भारत में चिप टेस्टिंग और पॅकेजिंग सुविधा के लिए 825 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी. इसलिए कभी न कभी हम चिप बना ही लेंगे.’’
