बांसुरी स्वराज (सोर्स- सोशल मीडिया) 
दिल्ली

सिर्फ एक मिस्ड कॉल और आप बनेंगे नारी शक्ति का हिस्सा, बांसुरी स्वराज ने जारी किया खास नंबर

Nari Shakti Vandhan Adhiniyam: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए दिल्ली में विशेष अभियान शुरू किया गया, बांसुरी स्वराज और कमलजीत सहरावत ने एक मिस्ड कॉल नंबर जारी किया है।

सजल रघुवंशी

Women Reservation Bill: राजधानी दिल्ली में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस पहल के तहत आम लोगों को सीधे जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है जिससे महिलाओं के सशक्तिकरण के इस अहम कानून को व्यापक जनसमर्थन मिल सके। इस अभियान के तहत सांसद कमलजीत सहरावत और बांसुरी स्वराज ने संयुक्त प्रेसवार्ता में 9667173333 नंबर जारी किया।

लोगों से अपील की गई है कि वह इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में अपनी सहमति दर्ज कराएं। इसके साथ ही #नारीशक्तिवंदन हैशटैग भी लॉन्च किया गया, जिससे इस अभियान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से फैलाया जा सके।

अभियान में महिला नेताओं की भागीदारी

इस प्रेसवार्ता का संयोजन प्रदेश प्रवक्ता न्योमा गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष योगिता सिंह, महिला मोर्चा प्रभारी श्यामबाला, महामंत्री प्रियल भारद्वाज और वैशाली पोद्दार समेत कई महिला नेता मौजूद रहीं। सभी नेताओं ने एक स्वर में इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प जताया और इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

वुमेन लेड डेवलपमेंट की ओर बढ़ता भारत

कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के विजन को आगे बढ़ाते हुए यह अधिनियम लाया गया है। उन्होंने बताया कि आज महिलाएं नेवी, एयरफोर्स और अन्य क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और देश अब वुमेन लेड डेवलपमेंट की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने जानकारी दी कि 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष संसदीय सत्र प्रस्तावित है जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

संसद में 33% भागीदारी का लक्ष्य

बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अर्धनारीश्वर की अवधारणा समानता का प्रतीक है, लेकिन राजनीति में अभी यह संतुलन पूरी तरह नजर नहीं आता। उन्होंने बताया कि 2024 के चुनाव में महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा, फिर भी संसद में उनका प्रतिनिधित्व सीमित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2029 तक संसद में महिलाओं की भागीदारी 33 फीसदी तक पहुंचाई जा सकेगी। वहीं, न्योमा गुप्ता ने कहा कि 16 से 18 अप्रैल का संसदीय सत्र बेहद अहम साबित होगा, जो यह तय करेगा कि दशकों पुराना संवैधानिक वादा कब तक पूरा होता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर समर्थन देने की अपील की जिससे महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके और देश नई दिशा में आगे बढ़ सके।

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