निशानेबाज: कभी सुई भी नहीं बनाता था हिंदुस्तान, अब कर रहा विमान का निर्माण
1947 में आजाद हुए भारत में सुई तक नहीं बनती थी जबकि अब विमान भी बनेगा। पीएम मोदी ने वडोदरा में पहले प्राइवेट मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन प्लांट का उद्घाटन किया। इस पर पड़ोसी और निशानेबाज के बीच बातचीत हुई है।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
नवभारत, डेक्स: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, जब 77 वर्ष पहले भारत आजाद हुआ था तब यहां सुई तक नहीं बनती थी जबकि अब हमारा देश विमान भी बनाने लगा है। प्रधानमंत्री मोदी और स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज ने वडोदरा में पहले प्राइवेट मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन प्लांट का उद्घाटन किया। अब भारत में सी-295 विमान बनेंगे जिन्हें भारतीय वायुसेना का महाबली कहा जाता है। यह मेक इन इंडिया के लिए अत्यंत गौरव की बात है।’’
हमने कहा, ‘‘हमारे भारत के गौरवशाली अतीत को याद कीजिए। हमारे यहां पुष्पक विमान था जो मन की शक्ति से चलता था उसमें कितने ही लोग बैठ जाएं, एक सीट खाली रहती थी। भगवान राम सीता और लक्ष्मण, हनुमान सहित पुष्पक विमान से वानरवीरों और विभीषण के साथ लंका से अयोध्या आए थे। आरविल राइट और बिल्वर राइट बंधुओं द्वारा अमेरिका में विमान बनाने के पहले भारत में विष्णु तलपड़े नामक व्यक्ति ने विमान बनाकर उसे मुंबई की चौपाटी में उड़ाकर दिखाया था। हमारे वैदिक ग्रंथों में विमान शास्त्र भी शामिल था। अनेक पुराणों व रामायण में लिखा है कि देवता विमानों से पुष्पवृष्टि या फूलों की वर्षा करते थे।’’
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पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, अपने अतीत के प्रति आत्मसम्मान रखना अच्छी बात है लेकिन वर्तमान समय की आधुनिक उपलब्धियों को देखिए। विदेशी हमलावरों और अंग्रेजों ने सदियों तक हमें गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखा। उन्होंने हमारा ज्ञान-विज्ञान जानबूझकर नष्ट किया। नालंदा विश्वविद्यालय में सारी दुनिया से लोग पढ़ने आते थे। वहां का पुस्तकालय इतना बड़ा था कि जब हमलावरों ने वहां आग लगाई तो महीनों तक जलता रहा। भारतीयों की मेधा और प्रतिभा कभी कम नहीं रही।”
पड़ोसी ने कहा, ‘‘जगदीशचंद्र बोस ने सबसे पहले टेलीग्राफ का आविष्कार किया लेकिन भारत पराधीन होने से इसका श्रेय अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को मिला। आज हमारा देश दक्षिण एशिया की महाशक्ति है और जर्मनी को पछाड़कर विश्व की चौथे नंबर की इकोनामी बन गया है। निश्चित रूप से चीन हमसे बहुत आगे है लेकिन हमारा देश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2047 तक हम 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी बनने का तर्कपूर्ण लक्ष्य रखकर चलते हैं। इस विकास यात्रा में हम सभी को योगदान देना चाहिए। दीपावली समृद्धि का पर्व है। इस अवसर पर भारत के मंगलमय उत्कर्ष की हम कामना करते हैं।’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
