नवभारत संपादकीय: गैस संकट से रसोई, उद्योग सभी प्रभावित

Gas Supply Crisis: होर्मुज खाड़ी में जहाजों की आवाजाही रुकने से भारत में एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर संकट गहरा गया है। ईंधन संकट के बीच केंद्र सरकार को एस्मा लागू करना पड़ा है।
Navabharat Editorial: Kitchens and Industries Alike Hit by Gas Crisis
Hormuz Strait Energy Crisis ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Hormuz Strait Energy Crisis: आखिर गैस संकट की वजह से केंद्र सरकार को एस्मा (अत्यावश्यक वस्तु देखभाल कानून) लागू करना पड़ा। भारत में ईंधन के प्रश्न पर चिंता व्याप्त हो गई है। विश्व के 20 प्रतिशत ईंधन की आवाजाही करने वाली होमुंज की खाड़ी से ईरान ने जहाजों का यातायात रोक दिया है।

इस खाड़ी के जरिए सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर तथा यूएई से कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस की भारत, चीन, जापान व दक्षिण कोरिया को होने वाली सप्लाई रुक गई है। यहां से 84 प्रतिशत तेल एशियाई बाजार में पहुंचता है।

इस रुकावट की वजह से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति ठप हो गई है। यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकला तो हर रसोईघर पर इसका असर पड़ेगा। भारत को खाड़ी देशों से 90 प्रतिशत एलपीजी (रसोई गैस) की पूर्ति होती है।

इसके अलावा कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस व यूएई से 87 प्रतिशत एलएनजी आती है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है जिसमें प्रचंड ऊर्जा की आवश्यकता उद्योग परिवहन, कृषि व शहरों को ऊर्जा चाहिए।

पिछले 50-60 वर्षों से लोगों ने लकड़ी, कोयला, भूसा जैसे पारंपरिक इंधन का उपयोग छोड़कर रसोई गैस जैसी स्वचा ऊजी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

यदि गैस उपलब्ध नहीं हुई तो खाना कैसे पकेगा? उद्योग परिवहन सभी पर विपरीत असर पड़ेगा। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने और सप्लाई में 25 दिनों का विलंब जैसे संकट से हालत गंभीर होना निश्चित है।

सरकार ने आश्वासन दिया है कि जमाखोरी व कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। अस्पतालों व शैक्षणिक संस्थाओं को प्रमुखता से गैस आपूर्ति की जाएगी। भारतीय तेल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन में वृद्धि करने का निर्देश दिया गया है लेकिन उनकी भी एक सीमा है।

रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी, कैटरिंग सेवा जैसे व्यवसाय एलपीजी पर निर्भर हैं। गैस सप्लाई कम होने पर खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ेंगे और महंगाई में वृद्धि होगी। उर्वरक कारखाने, पेट्रोकेमिकल, फौलाद, सिरामिक टाइल व कांच बनाने वाले उद्योग एलएनजी पर निर्भर हैं।

ऐसी परिस्थिति देखते हुए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का विस्तार करना होगा। गैस के साथ ही पेट्रोल और डीजल के बारे में भी सोचना होगा, देश में करोड़ों वाहन हैं। यदि परिवहन ठप पड़ा तो लोगों तक चीजें नहीं पहुंचेगी।

लॉजिस्टिक पर बुरा असर पड़ेगा। वाहन उद्योग व औषधि निर्माण भी प्रभावित होगा। कृषि पर भी असर आएगा, क्योंकि ट्रैक्टर व ट्रक चलना जरूरी है। यद्यपि रूस की ओर से क्रूड ऑयल की सप्लाई हो रही है लेकिन भारत की मांग काफी अधिक है।

सरकार युक्तिसंगत ढंग से समस्या से निपटने का प्रयास कर रही है, फिर भी युद्ध जितनी जल्दी खत्म हो उतना ही अच्छा अन्यथा सभी तरफ हालात बेकाबू हो जाएंगे।

यदि गैस उपलब्ध नहीं हुई तो खाना कैसे पकेगा? उद्योग परिवहन सभी पर विपरीत असर पड़ेगा। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने और सप्लाई में 25 दिनों का विलंब जैसे संकट से हालत गंभीर होना निक्षित है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जमाखोरी व कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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