

पंजाब, हिमाचल और बिहार में बढ़ता नशा युवाओं के लिए खतरा।
2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने का लक्ष्य।
ड्रग तस्करी से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद को खतरा।
नशा मुक्ति, जागरूकता और तस्करों पर सख्त कार्रवाई जरूरी।
Drug Trafficking Prevention and Youth Rehabilitation: शीले पदार्थों या ड्रग्स का सेवन युवाओं के स्वास्थ्य को खोखला करता जा रहा है, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में यह समस्या बेहद चिंताजनक हो चली है। सेना व सुरक्षा बलों में बड़े पैमाने पर पंजाब के हट्टे-कट्टे युवकों की भर्ती होती रही है, लेकिन अब ड्रग्स सेवन की लत की वजह से वैसी शारीरिक क्षमता वाले नौजवान मिल पाना कठिन होता जा रहा है।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों में ड्रग्स का सेवन काफी बढ़ गया है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए ड्रग की तस्करी होती है। ड्रोन से भी नशीले पदार्थ भेजे जाने लगे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा कर दी कि भारत को 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग मुक्त कर दिया जाएगा। वह ड्रग्स के काले धंधे को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हैं।
नशीले पदार्थों की लत परिवारों को बर्बाद कर देती है तथा युवाओं को शारीरिक व मानसिक रूप से गहरी क्षति पहुंचाती है। ड्रग तस्करी का जाल बहुत व्यापक तथा करोड़ों-अरबों रुपये की अवैध कमाई से जुड़ा है। यह रकम आतंकवाद को बढ़ावा देने के काम आती है। ड्रग सप्लाई का एक रास्ता खत्म किया जाता है, तो तस्कर दूसरा रास्ता खोज लेते हैं। संगठित अपराध तथा राष्ट्रविरोधी कार्रवाइयों के पीछे भी ड्रग के धंधे का पैसा है।
डिजिटल नेटवर्क तथा सीमा पार से तस्करी ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। बेहतर खुफिया नेटवर्क, सीमा पर कड़ी निगरानी, पुलिस बल के समन्वय, वित्तीय जांच आदि से ड्रग की तस्करी पर अंकुश लगाया जा सकता है। ड्रग सेवन का आदी बन चुका व्यक्ति ही ड्रग के धंधे को आगे बढ़ाता है, क्योंकि उसे खुद के लिए ड्रग या नशे की सीरीज खरीदने के लिए रकम लगती है। इसलिए पहले मुफ्त में ड्रग का सेवन कराने के बाद उस व्यक्ति को ड्रग कैरियर बनने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।
नशे का गुलाम व्यक्ति ड्रग नहीं मिलने पर बुरी तरह छटपटाता है। ड्रग लेने के अभ्यस्त लोगों को नशा मुक्ति केंद्र ले जाकर उनका उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास करना होगा। उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा। जिस तरह नक्सलवाद के सफाये के लिए व्यापक अभियान छेड़ा गया, वैसी ही कार्रवाई ड्रग की समस्या से निपटने के लिए की जा सकती है। देश को ड्रग मुक्त करना है तो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लेना, इस धंधे के सौदागरों और इसके लिए वित्तपूर्ति करने वालों पर कार्रवाई करनी होगी।
उन भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कड़ी निगरानी रखनी होगी, जो इस धंधे को पनपने दे रहे हैं। ड्रग्स के व्यवसाय का नेटवर्क ध्वस्त करना होगा। शिक्षा संस्थाओं में नशे के खिलाफ जागृति अभियान चलाना आवश्यक है, क्योंकि नशे के सौदागर स्कूल, कॉलेजों के छात्रों के बीच अपना जाल फैलाते हैं। नागरिक समुदाय का भी सहयोग लेना आवश्यक है, क्योंकि अनेक परिवार नशे की इस त्रासदी को भोग रहे हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा