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संपादकीय: सरकार का ध्यान क्यों नहीं, किसान आत्महत्या की कब तक होती रहेगी उपेक्षा
- Written By: दीपिका पाल
महाराष्ट्र में जनवरी 2015 से मार्च 2019 तक महाराष्ट्र में 12,616 किसानों ने खुदकुशी की. 2023 तक राज्य में औसतन प्रतिदिन 7 किसानों ने मौत को गले लगाया. गत सप्ताह कैलाश अर्जुन नगारे ने की आत्महत्या।

किसानों की आत्महत्या (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: प्रगतिशील राज्य कहलानेवाले महाराष्ट्र के लिए किसानों की आत्महत्या एक बड़ा कलंक है. जब किसान हर तरह से हताश और निरुपाय हो जाता है तभी वह ऐसा भयानक कदम उठाता है. जनवरी 2015 से मार्च 2019 तक महाराष्ट्र में 12,616 किसानों ने खुदकुशी की. 2023 तक राज्य में औसतन प्रतिदिन 7 किसानों ने मौत को गले लगाया. गत सप्ताह कैलाश अर्जुन नगारे नामक विदर्भ के किसान कार्यकर्ता ने आत्महत्या कर ली।
14 गांवों के लिए सिंचाई व्यवस्था की मांग को लेकर वह संघर्षरत था. गत वर्ष उसने 10 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, इतने पर भी किसानों की समस्याओं और मांगों की अनदेखी की गई। सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. महाराष्ट्र में सिर्फ 20 प्रतिशत इलाके में सिंचाई उपलब्ध है जो पश्चिम महाराष्ट्र के गन्ना, अंगूर उत्पादकों तक सीमित है. इसके विपरीत विदर्भ और मराठवाडा सिंचाई से वंचित हैं. 80 प्रतिशत राज्य की फसलें वर्षा पर निर्भर हैं. भूजल का स्तर नीचे चले जाने से बोरवेल भी काम नहीं करते. इन क्षेत्रों में मुख्यत: कपास, ज्वार, दाल, सोयाबीन की उपज होती है।
पर्याप्त वर्षा न होने या बेमौसमी बारिश से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. मौसम की मार के अलावा बीज और खाद की बढ़ती कीमतों से किसान परेशान हैं. बाजार के उतार-चढ़ाव व भंडारण की सीमित सुविधा से भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. विदर्भ और मराठवाडा में लघु सिंचाई प्रकल्प नहीं पहुंचे. उचित जल प्रबंधन और कम पानी में पैदावार देनेवाली फसलों से समस्या हल हो सकती है. अमेरिका में किसानों को सरकार से अधिक वित्तीय सहायता मिलती है जो कि सब्सिडी नहीं बल्कि सीधे भुगतान के तौर पर होती है. वहां किसानों के लिए प्राइस लॉस कवरेज है जिससे फसल के दाम घटने पर 22 तरह की फसलों पर सुरक्षा मिलती है।
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इसके अलावा एग्रिकल्चर रिस्क कवरेज है जो खेती के जोखिम की भरपाई करता है. किसान खेती करना छोड़ कर शहर में रहने न चले आएं, इसके लिए उन्हें प्रतिवर्ष अमेरिका की सरकार 32.2 अरब डॉलर की सहायता देती है. भारत में खाद, बिजली व पानी पर सब्सिडी दी जाती है लेकिन फसलों का मूल्य कम मिलने से किसान की लागत तक नहीं निकल पाती. अमेरिका की तुलना में भारत में काफी बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. अमेरिकी किसान परिवार की औसत आय 80,610 डालर है. किसानों के आर्थिक हित के लिए अमेरिकन रिलीफ एक्ट लागू किया गया जिस पर दिसंबर 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति बाइडन ने दस्तखत किए थे।
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इससे वहां के किसानों को 2025 में 42.4 अरब डॉलर का सीधा भुगतान होगा. भारत में भी किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. यहां न तो सभी फसलों पर एमएसपी मिलता है न किसानों की मांगों को गंभीरता से लिया जाता है. उनका आंदोलन व लंबा अनशन भी सरकार पर कोई असर नहीं करता।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
How long will farmer suicides continue to be ignored
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