नवभारत विशेष: ऋग्वेद से शिकागो और हुगली तक, स्वामी विवेकानंद के योग संदेश की वैश्विक यात्रा

Global Journey Of Yoga: ऋग्वेद के प्राचीन सूत्रों से वैश्विक रंगमंच तक पहुंची योग की सनातन यात्रा ने आज हुगली के तटों पर लौटकर अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक घर वापसी का नया अध्याय रचा है।
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स्वामी विवेकानंद (डिजाइन फोटो)
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Yoga Day At Hooghly River: योग के प्रारंभिक बीज ऋग्वेद (लगभग 1500-1200 ईसा पूर्व) में मिलते हैं, जहां तप और ध्यान जैसी अवधारणाओं का उल्लेख किया गया है। आगे चलकर इन विचारों का विकास उपनिषदों में हुआ, जिन्होंने योग के अनेक दार्शनिक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया। हालांकि योग को उसका सर्वाधिक व्यवस्थित स्वरूप महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र (लगभग 200 ईसा पूर्व-400 ईस्वी) ने प्रदान किया। इसमें अष्टांग योग अथवा 8 अंगों वाले मार्ग का वर्णन किया गया है, जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। पतंजलि के अलावा, भगवद्रीता योग को जीवन जीने के गतिशील दर्शन के रूप में प्रस्तुत करती है।

स्वामी विवेकानंद ने किया पाश्चात्य जगत में भारतीय योग का शंखनाद

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो और उसके बाद अमेरिका भर में तथा यूरोप के विभिन्न देशों में अपने व्याख्यानों के माध्यम से पश्चिमी जगत को राजयोग, ज्ञानयोग, कर्मयोग तथा भक्तियोग से परिचित कराया। पतंजलि के योग सूत्रों पर आधारित उनकी पुस्तक 'राजयोग' पश्चिमी समाज के लिए योग-दर्शन का परिचय कराने वाली प्रारंभिक और सर्वाधिक प्रभावशाली कृतियों में से एक बन गई। राजयोग पर दिए अपने व्याख्यानों में स्वामी विवेकानंद ने योग को मानव चेतना के आंतरिक आयामों की खोज करने वाली एक व्यवस्थित और अनुभव-आधारित साधना के रूप में प्रस्तुत किया।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना और बंगाल में योग की अंतर्धारा

स्वामी विवेकानंद का मानना था कि मानवता के लिए भारत का सबसे बड़ा योगदान उसकी आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा है और योग उस परंपरा की सबसे गहन तथा स्थायी अभिव्यक्तियों में से एक है। 1897 में भारत लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद ने देशभर में व्याख्यान दिए और लोगों को भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को पुनः खोजने के लिए प्रेरित किया। 1 मई 1897 को स्वामी विवेकानंद ने हावड़ा के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर है। उस जगह से थोड़ी ही दूरी पर जहां रामकृष्ण ने दक्षिणेश्वर में अपने आखिरी साल बिताए थे। बंगाल में हुगली नदी के तट पर स्थापित यह संस्थान एक आंदोलन का वैश्विक मुख्यालय बन गया, जिसने वेदांत के आदर्शों, सेवा को पूजा मानना तथा योग-दर्शन के व्यावहारिक अनुप्रयोग का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जैसे आध्यात्मिक गुरुओं की धरती होने के बावजूद बदलते समय के साथ बंगाल में योग की सार्वजनिक दृश्यता धीरे-धीरे कम होती गई। जीवनशैली में परिवर्तन, आधुनिक प्राथमिकताओं के उभरने और सामाजिक संरचना में बदलाव के कारण योग धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन के केंद्र से दूर होता गया। फिर भी, इसकी जड़ें आध्यात्मिक संस्थाओं और समर्पित साधकों के माध्यम से जीवित रहीं।

वैश्विक उत्सव और योग की ऐतिहासिक घर वापसी

11 सितंबर 1893 को शिकागो में 'अमेरिका के बहनों और भाइयों' के अमर अभिवादन के साथ शुरुआत करते हुए, स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण के माध्यम से दुनिया को भारत के आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित कराया। कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव के साथ, ऐसा लग रहा है मानो योग की खूबसूरत घर वापसी उसी सरजमीं पर हो रही है, जहां से इसके संदेश ने विश्व मंच तक की अपनी यात्रा प्रारंभ की थी।

हुगली नदी के तट एक बार फिर इस बात के साक्षी बन रहे हैं कि लोग एक ऐसी परंपरा का उत्सव मनाने के लिए एकत्र हो रहे हैं। 'शिकागो से हुगली' तक की यात्रा केवल एक अभ्यास की यात्रा नहीं है, यह एक विचार और वास्तव में एक भावना की यात्रा है, जो संतुलन, करुणा और आत्मचेतना के माध्यम से तथा आंतरिक सामंजस्य की खोज के द्वारा मानवता को निरंतर जोड़ती रहती है।

भारत से शिकागो और फिर हुगली तक

समूचे इतिहास में कुछ विचार सरहदों के पार जाकर समाजों को बदलते रहे हैं। योग भारत की प्राचीनतम परंपराओं में से एक है, जिसकी यात्रा प्राचीन शास्त्रों से शुरू होकर वैश्विक मान्यता तक जा पहुंची है। 'योग' शब्द जो संस्कृत के मूल शब्द 'युज' से लिया गया है, जिसका अर्थ है जोड़ना एकत्व स्थापित करना। अपने भीतर दार्शनिक चिंतन और व्यावहारिक अनुशासन की एक समग्र प्रणाली समाहित किए हुए है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति (जीवात्मा) का सार्वभौमिक चेतना (परमात्मा) के साथ मिलन कराना है।

लेख- प्रतापराव जाधव, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री के द्वारा