नवभारत संपादकीय: फुटपाथ पर कब्जा, सड़क पर खतरा; पैदल चलना क्यों बन गया चुनौती?
Pedestrian Safety Crisis: शहरों में फुटपाथ अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। पैदल चलना जोखिम भरा होता जा रहा है और राहगीरों की सुरक्षा व सुविधा गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
राहगीरों की सुरक्षा व सुविधा पर गंभीर चिंता(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Urban Footpath Encroachment Problem: समय ऐसा आ गया है कि पैदल चलना जानलेवा हो गया है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि स्वस्थ रहना है तो प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा पैदल चलो, लेकिन कोई चले भी तो कहां? फुटपाथ या साइडवाक पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है तो कहीं चेम्बर का ढक्कन नदारद है। ध्यान न रहे तो अच्छा भला इंसान गंदे नाले में गिर सकता है।
लोग मजबूरी में सड़क के किनारे चलते हैं क्योंकि फुटपाथ उपलब्ध नहीं है। वहां वाहन खड़े हैं, शोरूम का सामान सजाया हुआ है। चाय-नाश्ते की दुकाने लगी हुई हैं। किसे है पैदल चलने वाले के लिए फुटपाथ खाली रखने की चिंता।
पहले लोग शहरों में आराम से 4-5 किलोमीटर पैदल चलकर अपने स्कूल, कॉलेज, कार्यालय जाया करते थे लेकिन 30-40 वर्षों में सभी वाहनधारी हो गए, पैदल चलने वाले को लोग हैरत से देखते हैं। फुटपाथ विक्रय स्थल बन गए हैं। वहां पौधों की नर्सरी लगी है।
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अतिक्रमण और लापरवाही से पैदल चलना बना जानलेवा, बढ़ीं दुर्घटनाएं
बच्चों के खिलौने, कपड़े, बेल्ट, गॉगल, क्रिकेट के बैट, सस्ता फर्नीचर बिकता नजर आएगा। वहां पोस्टर, बैनर-कटआउट को जगह मिलेगी। फुटपाथ चलने के लिए नहीं, बाजार सजाने के लिए रह गया है। सड़क के किनारे चलना भी मौत को दावत देना है। पीछे से कौन सी गाड़ी आकर ठोक देगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है।
एनसीआरवी की रिपोर्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में 85 प्रतिशत से ज्यादा मौत की वजह मानव की गलती बताया गया है। सड़क पर चलोगे तो समझो मरोगे। पहले लोग आसानी से सड़क पार करते थे। अब कोई वाहन चालक किसी के लिए रुकता या गति धीमी नहीं करता।
विगत कुछ वर्षों में पैदल चलने वालों की दुर्घटना से मौत के मामलों में 58 प्रतिशत वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय व राज्य महामार्ग तथा उड़ान पुल पर पैदल चलने वाले अधिकांश लोग किसी वाहन की टक्कर से बुरी तरह घायल होते हैं या जान गंवा बैठते हैं।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुटपाथ और सुरक्षित मार्गों की जरूरत
देश के 50 बड़े शहरों में 11 से 13 प्रतिशत दुर्घटना में मरने वाले पैदल चलनेवाले ही होते हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में पैदल चलने वाले 4,712, बिहार में 4,149, महाराष्ट्र में 3344 तथा बंगाल में 3,214 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई। सड़कों पर बस, आटो, टैक्सी, निजी वाहनों की भीड़ रहती है वहां पैदल चलना जान को जोखिम में डालना है।
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सर्वोच्च अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि पैदल चलना नागरिकों का मूलभूत अधिकार है। शहरी विकास प्राधिकरण महापालिका, नगरपालिका, ग्रामपंचायत आदि को चिन्हांकित फुटपाथ उपलब्ध कराने चाहिए। इसे सभी संबंधित गंभीरता से लें। किसी इंसान की सड़क दुर्घटना में मौत उसके परिवार को उजाड़ कर रख देती है। फुटपाथ उपल्बध रहें तो लोग वाहनों की चपेट में आने से बचेंगे। रास्ता पार करने के लिए फुट ओवरब्रिज या अंडरब्रिज भी बनाए जाएं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
