कमला हैरिस का अफ्रीकी या भारतीय मूल, ट्रंप के हृदय में उठता शूल
पहले भी अमेरिका में महिलाओं ने राष्ट्रपति बनने की कोशिश की लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। अब कमला हैरिस भी इसी कोशिश में है, लेकिन अब उन के नागरिकता पर लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प चाहते हैं कि अफ्रीकी मूल के अमेरिकन कमला हैरिस को समर्थन न दें।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, हैरत की बात यह है कि कमला हैरिस को लेकर ट्रम्प बुरी तरह हैरान हैं। अफ्रीकी मूल के अश्वेत अमेरिकन को उन्होंने बताया है कि हैरिस हमेशा से भारतीय मूल की रही हैं और अब खुद को ब्लैक या अश्वेत बताने में लगी हैं। अपने इस दावे के समर्थन में ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर साड़ी पहनी हुई कमला हैरिस का फोटो डाला है जिसमें वह अपनी मौसी और नाना-नानी के साथ है। हैरिस की मां चेन्नई की रहनेवाली श्यामला गोपालन थीं। ट्रम्प चाहते हैं कि अफ्रीकी मूल के अमेरिकन कमला हैरिस को समर्थन न दें।’’
हमने कहा, ‘‘ऐसी वर्णभेदी विचारधारा रखना अच्छी बात नहीं है। भारतीय माता और केन्याई पिता की संतान कमला हैरिस का जन्म अमेरिका में ही हुआ। इसलिए वह अमेरिकी संविधान और कानून के मुताबिक जन्मजात अमेरिकन हैं। उन्हें डबल एडवांटेज है। पिता अफ्रीकी और मां भारतीय होने से उन्हें दोनों समुदायों का समर्थन मिल सकता है। अमेरिका को बराक ओबामा के रूप में पहला अश्वेत प्रेसीडेंट मिला था। अब यदि कमला हैरिस जीतती हैं तो अमेरिका के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति होंगी।’’
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पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पहले भी अमेरिका में महिलाओं ने राष्ट्रपति बनने की कोशिश की लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। 1964 में मेन राज्य की मारग्रेट चेज स्मिथ को रिपब्लिकन पार्टी के 27 डेलीगेट का समर्थन मिला था। इसके 8 वर्ष बाद न्यूयार्क की शर्ले चिशहोम को 152 डेलीगेट का समर्थन मिला था। 2016 के चुनाव में हिलेरी क्लिंटन ने दावेदारी पेश की थी। अब कमला हैरिस ट्रम्प के खिलाफ किस्मत आजमा रही हैं।’’
हमने कहा, ‘‘कोई भारतीय मूल का व्यक्ति विदेश में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बन भी जाए तो वह उस देश का भला सोचेगा। ऋषि सुनक ने भी ब्रिटेन के पीएम रहते हुए ब्रिटिश हितों का विचार किया। इसलिए हमें अपने देश के नेताओं को देखना चाहिए। बाहर कौन तीर मारता है, इससे हमें क्या मतलब! वैसे तो ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी के मित्र हैं लेकिन यदि उन्होंने चुनाव जीता तो ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा देकर वह सिर्फ गोरे अमेरिकन को ही नौकरियां देंगे।’’ लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
