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Authoritarian Political Attitude: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, कुछ नेता स्वभाव से अकड़बाज होते हैं। वह किसी की नहीं सुनते। उनकर रवैया ऐसा रहता है कि मेरी मुर्गी की डेढ़ टांग! वह मानकर चलते हैं कि जहां हम खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी धुन के पक्के व्यक्ति हैं जिन्हें दूसरे की बात या सलाह बिल्कुल नहीं पटती। उनकी प्रवृत्ति एकाधिकारी या तानाशाही होती है।’
हमने कहा, ‘आपने सही पहचाना, ट्रंप यदि दुनिया के दादा हैं तो ममता भी बंगाल की दीदी हैं। उनका दिल कहता है- मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं, मेरी मर्जी। ट्रंप ने अपनी सनक में इजराइल का साथ देकर खुद को ईरान के साथ युद्ध में झोंक दिया और समूचे विश्व के लिए आफत ला दी। गैस और तेल का संकट उन्हीं के कारनामों की वजह से है। ईरान चोट खाए सर्प की भांति अमेरिका के मित्र खाड़ी देशों के गैस फील्ड और रिफाइनरी को निशाना बना रहा है। होर्मुज की खाड़ी से तेलवाही जहाजों का यातायात रोक कर ईरान ने दिखा दिया कि वह अरब देशों की अर्थव्यवस्था को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है। उसने अरब शेखों की शेखी भुला दी। कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन सभी परेशान हैं। अमेरिका ने ईरान पर हमला कर अरब राष्ट्रों का अरबों डॉलर का नुकसान कर दिया। इजराइल में इतनी धमक नहीं थी कि ईरान से अकेले पंगा ले सके इसलिए उसने खुशामद कर राष्ट्रपति ट्रंप को पटाया और उकसाया। ईरान के टॉप लीडर मारे गए लेकिन वह अब भी घुटने नहीं टेक रहा है।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज ट्रंप की दादागिरी की बहुत चर्चा हो गई। अब बंगाल की ममता बनर्जी की दीदीगिरी पर ध्यान दीजिए जिन्होंने गवर्नर को निशाने पर लेते हुए कहा कि आरएन रवि केंद्र का आदमी है। यदि वाशिंगटन डीसी के दादा ट्रंप तय करना चाहते हैं कि ईरान का अगला नेता कौन होगा तो बंगाल की दीदी भी चाहती हैं कि राज्यपाल केंद्र का भेजा न होकर उनके किसी गली-मोहल्ले का हो। दुनिया ट्रंप से परेशान है तो चुनाव में ममता बीजेपी को परेशान कर डालेंगी। मोदी-शाह को उनके तीखे वाकप्रहार झेलने पड़ेंगे। दीदी की दहलीज को पार करना लोहे के चने चबाने जैसा है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा