Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

नवभारत विशेष: पहले भी कांग्रेस में रहा है विचारधारा का टकराव

Congress Ideological Conflict: कांग्रेस में विचारधारा का टकराव नया नहीं है। जानें इसके ऐतिहासिक उदाहरण, नेताओं के मतभेद और पार्टी की राजनीति व भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Dec 17, 2025 | 12:56 PM

पहले भी कांग्रेस में रहा है विचारधारा का टकराव (सौ.डिजाइन फोटो)

Follow Us
Close
Follow Us:

नवभारत डिजिटल डेस्क: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिल्कुल ठीक कहा है कि कांग्रेस में हमेशा से एक से अधिक विचारधाराएं रही हैं।इसे समझने के लिए अतीत में झांकें तो पता चलेगा कि महात्मा गांधी ने गोरखपुर जिले के चौरीचौरा में भड़की हिंसा से क्षुब्ध होकर 1921 में असहयोग आंदोलन समाप्त करने का अचानक फैसला ले लिया था।राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन रोकने के पीछे बापू की दलील थी कि साध्य के साथ साधन भी पवित्र होने चाहिए।लोगों ने हिंसा कर साधन को अपवित्र कर दिया।देशबंधु चित्तरंजनदास और मोतीलाल नेहरू महात्मा गांधी से असहमत थे।उन्होंने 1 जनवरी 1923 को स्वराज पार्टी बना डाली, जिसका प्रथम अधिवेशन इलाहाबाद में हुआ।

स्वराज का अर्थ था ‘अपना राज’ या ‘होम रूल’ जिसका उल्लेख दयानंद सरस्वती ने किया था।स्वराज पार्टी की मांग मानकर 1924 में कांग्रेस को चुनाव लड़ने की अनुमति मिली।बाद में स्वराज पार्टी भंग कर चित्तरंजनदास व मोतीलाल कांग्रेस में आ गए।इसके काफी समय बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस का महात्मा गांधी से टकराव का प्रसंग आया।सुभाष बाबू ने महात्मा गांधी समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीता।गांधी ने दुखी होकर कहा था कि पट्टाभि की हार मेरी हार है।गांधी के प्रभाव वाली कार्यकारिणी ने सुभाष बाबू को सहयोग देने से इनकार किया, तो उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर फॉरवर्ड ब्लॉक बना लिया।सुभाष बाबू ने बाद में आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया।उनका हिंसा का रास्ता गांधी को पसंद नहीं था।इसके बाद भारत के अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य ने कांग्रेस से दूरी बनाकर 1959 में स्वतंत्र पार्टी बनाई, जो लाइसेंस राज समाप्त कर मुक्त अर्थव्यवस्था लाने के पक्ष में थी।वह नेहरू की नीतियों के खिलाफ थे।इस पार्टी को पूर्व राजा-महाराजाओं का समर्थन प्राप्त था।यह पार्टी चल नहीं पाई।

राजगोपालाचार्य (राजाजी) की बेटी लक्ष्मी का विवाह महात्मा गांधी के पुत्र देवदास गांधी से हुआ था।बाद में राजाजी को बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था।डॉ।राममनोहर लोहिया पं।नेहरू के सचिव रह चुके थे।बाद में वह नेहरू के प्रबल विरोधी बन गए।संसद में दोनों के बीच तीखी बहस हुआ करती थी।लोहिया के समान ही आचार्य कृपलानी ने भी कांग्रेस से दूरी बनाकर समाजवादी पार्टी बनाई थी।वह पार्टी भी विघटित होकर प्रजा समाजवादी पार्टी (प्रसोपा) बन गई।इसी तरह कांग्रेस नेताओं का गुट यंग टर्क या युवा तुर्क कहलाने लगा था, जिनमें चंद्रशेखर, मोहन धारिया, कृष्णकांत व सुभद्रा जोशी का समावेश था।

सम्बंधित ख़बरें

भारत की विदेश नीति ‘मोदी की निजी पॉलिसी’, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर बोला जोरदार हमला

नवभारत संपादकीय: विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की रणनीति, नए चेहरों के सहारे सियासी वापसी की कोशिश

जेल से सीधे राज्यसभा जाएंगे उमर खालिद! मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस को लिखी चिट्ठी; जानें क्या कहा

‘आपको सिर्फ जंगल का निवासी बनाना चाहते हैं’, मोदी सरकार पर जमकर गरजे राहुल गांधी; उठाया आदिवासियों का मुद्दा

ये भी पढ़ें–  नवभारत विशेष के लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

यह कांग्रेस में रहने पर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना करने में पीछे नहीं रहते थे।1969 में कांग्रेस दो हिस्सों में टूट कर कांग्रेस आई और बुजुर्ग नेताओं की संगठन कांग्रेस बन गई थी।शरद पवार ने सोनिया के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ी थी।कांग्रेस में जी-20 गुट भी बना, जिसमें कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद आदि नेता थे।उन्होंने आगे चलकर पार्टी छोड़ दी।सोनिया गांधी के खिलाफ जीतेंद्र प्रसाद ने अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और हार गए थे।शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे से हार गए थे।वैचारिक टकराव तथा उपेक्षा की वजह से ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस छोड़ी थी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिल्कुल ठीक कहा है कि कांग्रेस में हमेशा से एक से अधिक विचारधाराएं रही हैं।इसे समझने के लिए अतीत में झांकें तो पता चलेगा कि महात्मा गांधी ने गोरखपुर जिले के चौरीचौरा में भड़की हिंसा से क्षुब्ध होकर 1921 में असहयोग आंदोलन समाप्त करने का अचानक फैसला ले लिया था।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

 

Congress ideological conflict history

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Dec 17, 2025 | 12:56 PM

Topics:  

  • Congress
  • Rahul Gandhi
  • Shashi Tharoor

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.