(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, अमेरिका के अरबपति ब्रायन जानसन ने मौत को चकमा देने के लिए ‘डोन्ट डाई’ या मरना मत मिशन शुरू किया है। वह अपना संपूर्ण भोजन सुबह 6 से 11 बजे तक कर लेते है जिसमें 1977 कैलोरी तथा 100 से ज्यादा सप्लिमेंट होते हैं। वह अपना वजन, बोन डेंसिटी, हार्ट रेट, मसल की मजबूती चेक करते हैं। त्वचा का रंग उजला रखने के लिए ब्लू लाइट थेरपी लेते हैं। 10 मिनट ध्यान लगाते हैं। रात 8:30 बजे तापमान नियंत्रित बिस्तर में लेटते ही 3 मिनट में सो जाते हैं। वह 47 साल के हैं लेकिन उनका दिल 37 वर्षीय व्यक्ति जैसा है। त्वचा भी 28 वर्ष के युवा जैसी है। वह अपने ‘मरना मत’ मिशन का संदेश देने हाल ही में भारत आए थे।’’
हमने कहा, ‘‘भारतवासियों को उनकी सलाह या संदेश की कोई जरूरत नहीं है। ब्रायन जानसन यदि हिंदू धर्म ग्रंथों को पढ़ें तो चकित रह जाएंगे। हमारे देश में सप्त चिरंजीव की धारणा है। ऐसे 7 लोग हैं जो अमर माने जाते हैं। इनके नाम हैं- वेदव्यास, बलि, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, परशुराम, विभीषण और हनुमानजी। कहते हैं कि अश्वत्थामा आज भी विंध्याचल के पहाड़ी क्षेत्र में घूमता रहता है। संत तुलसीदास और समर्थ रामदास को हनुमानजी ने दर्शन दिए थे। कहते हैं आल्हा-ऊदल जैसे वीर भाइयों में से आल्हा अमर है जो रात में आकर मैहर की शारदा मैया की पूजा करता है। मार्कंडेय मुनि को शंकरजी ने प्रचंड दीर्घायु का वरदान दिया था। वे भी सभी चारों युगों में बने रहते हैं। संत ज्ञानेश्वर से मिलने के लिए शेर पर सवार होकर आए योगी चांगदेव की आयु 400 वर्ष थी। वाराणसी में निवास करनेवाले महान योगी तैलंग स्वामी की आयु 300 वर्ष से ज्यादा थी।’’
निशानेबाज के और लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज महाभारत काल में भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और जयद्रथ के पिता भगदत्त की आयु भी 150 से 200 वर्ष के आसपास थी। तब पर्यावरण स्वच्छ था और आज के समान इन्फेक्शन नहीं था।’’
हमने कहा, ‘‘भारत में कुछ बूढ़े भी फिर से जवान हो गए थे। राजा ययाति ने अपने पुत्र से उसकी जवानी मांग ली थी और अपना बुढ़ापा उसे ट्रांसफर कर दिया था। अश्विनीकुमारों ने च्यवन ऋषि की वृद्धावस्था दूर कर उन्हें युवा बना दिया था। यह उस समय के च्यवनप्राश का कमाल था। अमेरिकी अरबपति ब्रायन जानसन चाहें तो भारत से जितना चाहें च्यवनप्राश मंगा सकते हैं। इससे उन्हें और युवा होने में मदद मिलेगी।’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा