नवभारत निशानेबाज: इस बार नहीं कर सकते मतदान, वोटिंग के हक से कर लो समाधान
Bengal Elections 2026: बंगाल में मतदाता सूची के 'शुद्धिकरण' पर उठा विवाद। पूर्व जज और कारगिल योद्धाओं के नाम गायब होने से चुनाव आयोग पर पक्षपात और 'ब्लंडर' के गंभीर आरोप।
- Written By: आकाश मसने
डिजाइन फोटो (नवभारत)
Bengal Elections 2026 Voter List Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, एक जमाने में बंगाल काला जादू के लिए प्रसिद्ध था। वहां के जादूगर पीसी सरकार समूची दुनिया में विख्यात थे। बंगाल में जब वामपंथियों का जादू था तब उनकी सरकार 3 दशक तक चली। फिर वहां ममता बनर्जी की टीएमसी का जादू चला।’
हमने कहा, ‘अब आप चुनाव आयोग के जादू को देखकर दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे। वहां ऐसा करिश्मा हुआ कि एक पूर्व न्यायाधीश, कारगिल युद्ध के सम्मानप्राप्त सैनिक, भारतीय पासपोर्टधारी नागरिक को अनेक दस्तावेज पेश करने के बाद भी उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। यह वंडर है या ब्लंडर?’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जब वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण होता है तो वह कहावत लागू होती है- जिन खोजा तिन पाइयां गहरे पानी पैठ! चुनाव आयोग ने अपने तरीके से मतदाता सूची का शुद्धिकरण कर दिया। मृतकों और स्थानांतरित लोगों के नाम हटाने से भी बहुत आगे बढ़कर लाखो लोगों के नाम इस तरह गायब हो गए जैसे गधे के सिर से सींग! नंदीग्राम में वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में 95 प्रतिशत मुस्लिमों का समावेश है। चुनाव के केवल 4 महीने पहले मतदाता सूची नए सिरे से बनाने की अनुमति दी गई। चुनाव आयोग को छूट दी गई कि वह हटाए गए नामों की मशीन रीडेबल सूची जारी न करे। अन्य राज्यों की तुलना में बंगाल में ज्यादा सख्ती से एसआईआर लागू किया गया। एकही परिवार में किसी का नाम सूची में था तो बाकी सदस्यों के नाम नदारद थे। इसकी कोई सुनवाई नहीं थी। पहले तो 58 लाख नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उन्होंने फार्म नहीं भरा था। कोई अनपढ़ है तो कैसे फार्म भरेगा?’
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हमने कहा, ‘जिस तरह व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए मोटापा दूर करना जरूरी है, वैसे ही लोकतंत्र की तंदुरुस्ती के लिए मोटी मतदाता सूची को पतला करना आवश्यक है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मुस्लिम मतदाताओं में 5 प्रतिशत कमी लाने का काम किया।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, आरोपों को जाने दीजिए। चुनाव के लिए समय कम रह गया है। जिन लोगों के पास जरूरी दस्तावेज हैं और फिर भी सूची में नाम नहीं है वह आगामी चुनाव तक प्रतीक्षा करें। अभी नहीं तो अगली बार। चुनाव होते रहेंगे लगातार !’
