Navabharat Nishanebaaz: घोटाले की बलि चढ़ा मंदिर का चंदा, धर्म को भी बना लिया धंधा
Ram Temple Controversy: अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों ने आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Ayodhya Ram Temple Donation Allegations: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनवाने के लिए बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद आदि ने अनुकूल माहौल बनाया। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र मंदिर बन गया, लेकिन मंदिर के चंदे में 1,400 करोड़ रुपये से ज्यादा घोटाला होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।’
हमने कहा, ‘आरोपों पर ध्यान मत दीजिए। आप श्रद्धा कायम रखते हुए भजन गाते रहिए-अयोध्या नगरिया में रामजी पधारे ! मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे! याद रखिए कि श्रद्धा में संशय का कोई स्थान नहीं रहता।’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, धर्म को धंधा बनाने वालों ने करोड़ों रुपये का घोटाला कर डाला। अमानत में खयानत कर डाली। भगवान से भी विश्वासघात किया। यह कितना बड़ा पाप है!’
हमने कहा, ‘आपने कहावत सुनी होगी- रामजी की चिड़िया, रामजी का खेत, खाओ चिड़िया भर-भर पेट ! भगवान के नाम भक्तों का भरपूर चढ़ावा आया तो उसका उतारा भी कर दिया गया। बिजनेस में चढ़ाव-उतार तो चलता ही रहता है।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, यह धर्म है, व्यवसाय नहीं! चढ़ावे का उपयोग मंदिर में पूजा, आरती, प्रसाद, भक्तों के लिए सुविधा, धार्मिक आयोजनों, दान-धर्म, चैरिटी के लिए होना चाहिए। मंदिर के मेंटनेंस और भव्यता बनाए रखने के बाद बची हुई मोटी रकम का इस्तेमाल स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, तीर्थयात्री निवास बनाने, नाममात्र के शुल्क पर भोजन व्यवस्था, अनाथाश्रम, विधवा आश्रम के लिए करना चाहिए। लोगों को चंदे का गबन करते हुए शर्म नहीं आई। छोटे लोग फंस रहे हैं और बड़े मगरमच्छों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। निर्मोही अखाड़े ने विश्व हिंदू परिषद पर मंदिर निर्माण के नाम पर 1400 करोड़ की वसूली का आरोप लगाया। चढ़ावे की लूट भी 200 करोड़ के पार जाने का अनुमान है। नोट गिनने वाले करोड़पति हो गए, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव व चंपत राय का सहयोगी टिन्नू पहले अयोध्या में ऑटोरिक्शा चलाता था। अब उसके पास एयरपोर्ट के करीब होस्टल है, जिसमें 70 कमरे हैं।’
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हमने कहा, ‘यह सब रामजी की लीला है। भगवान राम ने सुग्रीव को किष्किंधा का राज दिया था और विभीषण को लंकाधिपति बनाया था। अब मंदिर के नोट गिनने वालों और उनके आकाओं की किस्मत चमक रही है। किसी को कानून का डर नहीं है। एसआईटी जांच के नाम पर लीपापोती होगी। छुटभैयों पर कार्रवाई होगी, बड़े बच जाएंगे।’
