नवभारत संपादकीय: असम में बीजेपी का विवादास्पद वीडियो

Assam AI Video: असम बीजेपी के एआई वीडियो में मुख्यमंत्री को मुस्लिमों पर निशाना साधते दिखाने से बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। यह पोस्ट सांप्रदायिक तनाव और हिंसा को बढ़ावा देने वाली बताई जा रही है।
Navbharat Editorial: BJP's controversial video in Assam
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Himanta Sarma Controversy: आगामी कुछ सप्ताहों में चुनाव आयोग असम के विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर देगा। इस दौरान वहां की राजनीति गलत और विद्वेषपूर्ण दिशा में जा रही है। इससे जनता के बीच खलबली होना स्वाभाविक है। असम बीजेपी ने हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया। सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो का शीर्षक 'पॉइंट ब्लैक शॉट' है।

इसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक राइफल से 2 मुस्लिमों पर निशाना साधते दिखाई दे रहे हैं। राइफल से निकली गोली बीच में नजर आती है तथा वहां 'नो मर्सी' (कोई दया नहीं) लिखा हुआ है। यह वीडियो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाया गया है तथा हिंसा और दुर्भावना को बढ़ावा देने वाला है।

यद्यपि 2 समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने वाली इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया है लेकिन वीडियो अभी भी देखा जा सकता है। मुद्दा यह है कि क्या मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का एक समुदाय की ओर बंदूक तानने वाले चित्र को किसने और किस स्तर पर स्वीकृति दी।

असम की बीजेपी इकाई ने क्यों इस तरह के वीडियो को जारी करना उचित समझा, जिसमें एक समुदाय को धमकाया गया है। क्या असम के चुनाव बंदूक की नोक पर कराने का संदेश इसमें निहित है? चुनाब के मौके पर नफरत व डर का माहौल बनाने का वीडियो क्यों जारी किया गया? नागरिकों के एक समूह तथा वामदलों ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

समूह ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार अपने भाषणों से घृणा फैला रहे हैं और संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल सुनवाई करना मंजूर कर लिया है। किसी भी मुख्यमंत्री को राज्य की जनता के साथ निष्पक्ष रवैया रखना चाहिए जिसमें किसी के प्रति दुर्भावना न हो। मुख्यमंत्री का पद राज्य में लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत करने के लिए होता है।

क्या असम के मुख्यमंत्री इसके विपरीत आचरण नहीं कर रहे हैं? राज्य में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के पूर्व ही उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से 4.5 लाख मिया वोट काट दिए जाएंगे। यह ऐसा मुद्दा है जिसे चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और बीजेपी नेतृत्व को गंभीरता से लेना होगा। धर्मनिरपेक्ष भारत में संवैधानिक रूप से अल्पसंख्यकों को सुरक्षा व अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।

क्या असम में घुसपैठ की समस्या को हल करने के लिए ऐसा डराने व दहशत फैलाने वाला तरीका अपनाया जा रहा है? क्या राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में एक समुदाय विशेष को निशाना बनाना तय किया गया है? क्या बीजेपी की असम इकाई कुछ ज्यादा सक्रियता दिखा रही है और क्या इसे केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सहमति मिली हुई है? एसआईआर की अंतिम सूची में 2.43 लाख वोट कट गए हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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